नई दिल्ली | बिजनेस डेस्क देश के प्रमुख मीडिया घरानों में से एक और ‘दैनिक जागरण’ समाचार पत्र का संचालन करने वाली कंपनी जागरण प्रकाशन लिमिटेड (JPL) इन दिनों आयकर विभाग की जांच के घेरे में है। कंपनी को आयकर विभाग की ओर से करीब 1.19 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड का नोटिस प्राप्त हुआ है। यह नोटिस वित्त वर्ष 2024-25 के असेसमेंट से संबंधित है।
नोटिस की समयसीमा और कानूनी प्रावधान
कंपनी द्वारा शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, आयकर विभाग ने यह आदेश 24 मार्च 2026 को जारी किया था, जिसे कंपनी ने 25 मार्च को आधिकारिक रूप से प्राप्त किया।
यह पूरी कार्यवाही आयकर अधिनियम, 1961 की निम्नलिखित धाराओं के तहत की गई है:
- धारा 143(3) और 144B: इसके तहत विभाग ने फेसलेस असेसमेंट (Faceless Assessment) की प्रक्रिया पूरी की और टैक्स की यह मांग निर्धारित की।
- धारा 270A और 274: मुख्य टैक्स डिमांड के साथ-साथ विभाग ने पेनल्टी (जुर्माना) लगाने के लिए एक अलग कारण बताओ नोटिस भी जारी किया है।
क्या है मुख्य विवाद?
सूत्रों के अनुसार, यह डिमांड विभाग द्वारा किए गए असेसमेंट के आधार पर तय की गई है। आमतौर पर ऐसी डिमांड तब निकलती है जब विभाग को कंपनी द्वारा घोषित आय और विभाग की गणना के बीच अंतर दिखाई देता है। हालांकि, जागरण प्रकाशन ने स्पष्ट किया है कि वे विभाग के इस मूल्यांकन से सहमत नहीं हैं।
कंपनी की प्रतिक्रिया और भविष्य की रणनीति
नोटिस मिलने के तुरंत बाद कंपनी ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस कानूनी कार्यवाही का उनके व्यावसायिक संचालन (Business Operations) या वित्तीय सेहत पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
अगले कदम:
- NFAC में अपील: कंपनी ने इस आदेश को चुनौती देने का मन बना लिया है। इसके लिए जल्द ही नेशनल फेसलेस अपील सेंटर (NFAC) में अपील दायर की जाएगी।
- पेनल्टी का जवाब: पेनल्टी नोटिस के संबंध में कंपनी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखेगी।
- कानूनी परामर्श: कंपनी के कानूनी और टैक्स सलाहकार इस समय मामले की बारीकियों का अध्ययन कर रहे हैं ताकि अपील प्रक्रिया को मजबूत बनाया जा सके।
बाजार पर प्रभाव
निवेशकों के लिए राहत की बात यह है कि कंपनी ने इसे एक ‘नियमित प्रक्रिया’ बताया है और आश्वासन दिया है कि 1.19 करोड़ रुपये की यह राशि कंपनी के कुल टर्नओवर को देखते हुए इतनी बड़ी नहीं है कि इससे शेयरधारकों के हितों को नुकसान पहुँचे।
संपादकीय टिप्पणी: मीडिया सेक्टर की दिग्गज कंपनी पर आयकर विभाग की यह कार्रवाई उद्योग जगत में चर्चा का विषय बनी हुई है। अब सबकी नजरें नेशनल फेसलेस अपील सेंटर (NFAC) के फैसले पर टिकी हैं।





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