वाराणसी/नोएडा: मीडिया जगत से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। सुमित राय की बेदखली के बाद राष्ट्रीय सहारा को एक और बड़ा झटका लगा है। संस्थान के वरिष्ठ पत्रकार और वाराणसी यूनिट की जिम्मेदारी संभाल रहे विभूति नारायण चतुर्वेदी ने अपने पद और कंपनी से इस्तीफा दे दिया है।
ई-मेल के जरिए भेजा इस्तीफा
सूत्रों के अनुसार, विभूति नारायण चतुर्वेदी ने शुक्रवार को अपना इस्तीफा प्रबंधन को ई-मेल के जरिए भेज दिया। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि उनके इस फैसले को ‘तत्काल प्रभाव’ से स्वीकार किया जाए। खबर है कि कंपनी के कई उच्च अधिकारियों ने उन्हें मनाने और रोकने की कोशिश की, लेकिन वे अपने फैसले पर अडिग रहे।
क्यों टूटी 15 साल पुरानी डोरी ?
विभूति जी के इस्तीफे के पीछे कर्मचारियों की समस्याओं को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
बकाया भुगतान: वह लंबे समय से कर्मचारियों के वेतन और अन्य भुगतानों को लेकर प्रबंधन के सामने मजबूती से पक्ष रख रहे थे।
अनदेखी: बताया जा रहा है कि संस्थान की वर्तमान नीतियों और कार्यप्रणाली से वह संतुष्ट नहीं थे। उनकी बातों को लगातार अनसुना किया जा रहा था, जिससे आहत होकर उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
एक नजर उनके सफर पर
विभूति नारायण चतुर्वेदी का सहारा मीडिया के साथ सफर काफी लंबा और शानदार रहा है:
शुरुआत: उन्होंने फरवरी 2011 में सहारा टेलीविजन (नोएडा) में बतौर एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर जॉइन किया था।
वाराणसी का प्रभार: 2017 में उनका तबादला वाराणसी किया गया, जहां उन्होंने राष्ट्रीय सहारा अखबार की संपादकीय और प्रशासनिक जिम्मेदारी बखूबी संभाली।
विशेष टिप्पणी: मीडिया विश्लेषकों का मानना है कि सुमित राय के बाद विभूति नारायण जैसे जमीनी और अनुभवी पत्रकार का जाना राष्ट्रीय सहारा के लिए, विशेषकर पूर्वांचल क्षेत्र में, एक बड़ी क्षति साबित हो सकता है।






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