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विवाहित लड़की को अब भी किसी भी पुरुष (विवाहित/अविवाहित) के साथ रहने का अधिकार: हाईकोर्ट

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राहुल मिश्रा-हाईकोर्ट लखनऊ अवध बार एसोसिएशन-यूपी संपादक: Media4samachar 

केस का नाम : नीके लाल मेहरा बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य (Neeke Lal Mehra vs. State of Madhya Pradesh & Ors.)
​फैसले की तारीख: 2025
​जज: जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच।

कोर्ट का मुख्य आदेश (Key Ruling) –
​कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बालिग (Adult) महिला अपनी मर्जी की मालिक है और वह जिसके साथ चाहे, रह सकती है। भले ही वह शादीशुदा हो।
•✓ ​स्वतंत्रता का अधिकार :
कोर्ट ने कहा कि बालिग महिला कोई “संपत्ति” (Chattel) नहीं है। उसके पास अपनी पसंद का जीवन जीने का अधिकार है,
चाहे वह फैसला समाज की नजर में गलत ही क्यों न हो।
•√ ​विवाहित पुरुष के साथ रहना : कोर्ट ने टिप्पणी की कि “ऐसा कोई कानून नहीं है,
जो किसी महिला को विवाहित पुरुष के साथ रहने से रोकता हो।”
• ​नैतिकता पर कोर्ट का रुख : जजों ने कहा कि कोर्ट का काम “नैतिकता पर प्रवचन देना” (Pontificate on morality) नहीं है, बल्कि कानून के तहत नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।
​3. कानून की स्थिति (Legal Position)
​कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप और दूसरी शादी के बीच का अंतर भी समझाया:
​साथ रहना (Live-in): अगर कोई महिला किसी विवाहित पुरुष के साथ अपनी मर्जी से रह रही है, तो यह अपराध नहीं है।
​दूसरी शादी (Bigamy): अगर वे दोनों शादी कर लेते हैं, तो वह अपराध (Bigamy) होगा। लेकिन, इसकी शिकायत केवल उस पुरुष की पहली पत्नी ही कर सकती है। पुलिस या परिवार वाले इसमें सीधे दखल नहीं दे सकते।
​निष्कर्ष
​इस आदेश के तहत, पुलिस या परिवार किसी बालिग महिला को जबरदस्ती उसके प्रेमी (चाहे वह शादीशुदा हो) से अलग नहीं कर सकते, बशर्ते महिला ने अपनी मर्जी से उसके साथ रहने की बात कही हो।

​इस महत्वपूर्ण फैसले से जुड़ी मुख्य बातें यहां दी गई हैं:
​1. मामले का विवरण (Case Details)
​केस का नाम: नीके लाल मेहरा बनाम मध्य प्रदेश राज्य और अन्य (Neeke Lal Mehra vs. State of Madhya Pradesh & Ors.)
​फैसले की तारीख: 2025
​जज: जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच।
​2. कोर्ट का मुख्य आदेश (Key Ruling)
​कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक बालिग (Adult) महिला अपनी मर्जी की मालिक है और वह जिसके साथ चाहे, रह सकती है।
​स्वतंत्रता का अधिकार: कोर्ट ने कहा कि बालिग महिला कोई “संपत्ति” (Chattel) नहीं है। उसके पास अपनी पसंद का जीवन जीने का अधिकार है, चाहे वह फैसला समाज की नजर में गलत ही क्यों न हो।
​विवाहित पुरुष के साथ रहना: कोर्ट ने टिप्पणी की कि “ऐसा कोई कानून नहीं है जो किसी महिला को विवाहित पुरुष के साथ रहने से रोकता हो।”
​नैतिकता पर कोर्ट का रुख: जजों ने कहा कि कोर्ट का काम “नैतिकता पर प्रवचन देना” (Pontificate on morality) नहीं है, बल्कि कानून के तहत नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है।
​3. कानून की स्थिति (Legal Position)
​कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप और दूसरी शादी के बीच का अंतर भी समझाया:
​साथ रहना (Live-in): अगर कोई महिला किसी विवाहित पुरुष के साथ अपनी मर्जी से रह रही है, तो यह अपराध नहीं है।
​दूसरी शादी (Bigamy): अगर वे दोनों शादी कर लेते हैं, तो वह अपराध (Bigamy) होगा। लेकिन, इसकी शिकायत केवल उस पुरुष की पहली पत्नी ही कर सकती है। पुलिस या परिवार वाले इसमें सीधे दखल नहीं दे सकते।
​निष्कर्ष
​इस आदेश के तहत, पुलिस या परिवार किसी बालिग महिला को जबरदस्ती उसके प्रेमी (चाहे वह शादीशुदा हो) से अलग नहीं कर सकते, बशर्ते महिला ने अपनी मर्जी से उसके साथ रहने की बात कही हो।

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Author: media4samachar

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