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जनतंत्र टीवी न्यूज चैनल में महिला एंकर का मानसिक शोषण,शोक की घड़ी में मिली धमकियां—’क्या मुझे अपनों के मरने का इंतज़ार करना था ?’

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नई दिल्ली: मीडिया संस्थानों में काम करने वाली महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के दावों के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जनतंत्र टीवी (Jantantra TV) की जानी-मानी एंकर मीनाक्षी सिसोदिया ने संस्थान के भीतर हो रहे अमानवीय व्यवहार और मानसिक उत्पीड़न का कच्चा चिट्ठा खोल दिया है। उनकी आपबीती ने न केवल जनतंत्र टीवी बल्कि पूरे मीडिया जगत के ‘टॉक्सिक वर्क कल्चर’ को बेनकाब कर दिया है।

शोक की घड़ी में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा

​मीनाक्षी सिसोदिया ने अपने दर्द को साझा करते हुए बताया कि जब वे अपने जीवन के सबसे कठिन दौर और एक गंभीर पारिवारिक क्षति (Family Casualty) से गुजर रही थीं, तब संस्थान का व्यवहार सहयोगात्मक होने के बजाय बेहद क्रूर था।

​उन्होंने बताया कि जब उन्हें परिवार के पास होना चाहिए था, तब उन पर काम का दबाव बनाया गया। मीनाक्षी के अनुसार, उन्हें यहां तक कहा गया कि:

“फैमिली कैसुअलिटी के पहले क्यों चली गईं, बाद में जाना था। मरने का इंतज़ार करना था। कंपनी पॉलिसी में यह नहीं है।”

 

​एक जिम्मेदार न्यूज़ चैनल में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करना यह दर्शाता है कि वहां कर्मचारियों को इंसान नहीं, बल्कि महज एक मशीन समझा जाता है।

‘कंपनी पॉलिसी’ के नाम पर शोषण का खेल

​विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, मीनाक्षी ने बताया कि जनतंत्र टीवी में लंबे समय तक बिना ब्रेक के काम करना और अत्यधिक मानसिक दबाव झेलना एक नियति बन गई है। जब कोई कर्मचारी अपने अधिकारों या व्यक्तिगत संकट की बात करता है, तो प्रबंधन ‘कंपनी पॉलिसी’ का ढाल बनाकर उसका मानसिक शोषण करता है। मीनाक्षी ने सवाल उठाया है कि क्या कोई भी पॉलिसी मानवीय संवेदनाओं और जीवन-मृत्यु के संकट से ऊपर हो सकती है?

इंडस्ट्री से बाहर करने की धमकी और ‘ब्लैकमेलिंग’

​मीनाक्षी ने मीडिया जगत के उस डर का भी जिक्र किया जिसका इस्तेमाल कर पत्रकारों की आवाज दबाई जाती है। उन्हें और उनके जैसे कई कर्मियों को अक्सर यह कहकर डराया जाता है कि— “अगर आवाज उठाई या विरोध किया, तो इंडस्ट्री से बाहर कर दिए जाओगे।” इस पर कड़ा प्रहार करते हुए मीनाक्षी ने कहा:

  • खुद को सशक्त बनाएं: “जमाना बदल चुका है। खुद पर काम कीजिए, मल्टीटास्किंग बनिए। अगर आपके पास हुनर है, तो पैसा कहीं भी कमाया जा सकता है।”
  • अन्याय के खिलाफ चुप्पी तोड़ें: “किसी भी संस्थान के सामने घुटने टेकने के बजाय अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। अन्याय के सामने चुप रहना उसे बढ़ावा देना है।”

“हर अति की क्षति निश्चित है”

​धार्मिक ग्रंथों और श्री कृष्ण के उपदेशों का हवाला देते हुए मीनाक्षी ने स्पष्ट संदेश दिया कि समय का पहिया हमेशा घूमता है। उन्होंने लिखा कि जो लोग आज सत्ता और पद के अहंकार में दूसरों का अपमान कर रहे हैं, उन्हें यह याद रखना चाहिए कि “हर अति का अंत निश्चित होता है।”

मीडिया गलियारों में हड़कंप

​जनतंत्र टीवी की एंकर के इस साहसी खुलासे के बाद सोशल मीडिया पर पत्रकार बिरादरी और आम जनता के बीच भारी रोष है। लोग मांग कर रहे हैं कि महिला कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यह खबर अब केवल एक एंकर की लड़ाई नहीं, बल्कि न्यूज़ रूम्स में सम्मानजनक माहौल की मांग बन गई है।

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Author: media4samachar

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