समाचार प्रसारण जगत के लिए एक अहम फैसले में न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ने NCERT की पाठ्यपुस्तक में दिए गए एक काल्पनिक पत्र को आधार बनाकर ‘लव जिहाद’ की कहानी गढ़ने वाले पांच न्यूज़ चैनलों को कड़ी फटकार लगाई है। अथॉरिटी ने इन चैनलों के आठ प्रसारणों को साम्प्रदायिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त मानते हुए उन्हें सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाने का निर्देश दिया है।
न्यूज़ ब्रॉडकास्टिंग एंड डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ने अपने आदेश में कहा है कि कक्षा तीन की एनसीईआरटी की पर्यावरण अध्ययन की किताब में शामिल एक काल्पनिक पाठ को जानबूझकर तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया। इस पाठ में एक बच्ची द्वारा लिखे गए पत्र को कुछ चैनलों ने इस तरह दिखाया जैसे वह किसी तथाकथित ‘लव जिहाद’ साजिश का प्रमाण हो, जबकि वह पूरी तरह एक काल्पनिक शैक्षणिक सामग्री थी।
अथॉरिटी के मुताबिक जिन चैनलों के प्रसारण नियमों के उल्लंघन में पाए गए उनमें India TV, Zee News, ABP News, News18 मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ और Zee मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ शामिल हैं। इन चैनलों ने अलग अलग कार्यक्रमों में यह दावा किया कि NCERT की किताबों के जरिए बच्चों के मन में ‘लव जिहाद’ जैसी सोच भरी जा रही है।
NBDSA ने अपने फैसले में साफ कहा है कि किसी काल्पनिक कहानी में अलग धर्म के पात्रों की मौजूदगी को साम्प्रदायिक साजिश से जोड़ना न केवल गैर जिम्मेदाराना पत्रकारिता है बल्कि यह सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाने वाला है। अथॉरिटी ने माना कि चैनलों ने तथ्यों की पड़ताल किए बिना, संतुलित दृष्टिकोण अपनाए बिना और दूसरे पक्ष या विशेषज्ञ राय शामिल किए बिना बहस को उग्र और एकतरफा बना दिया।
आदेश में यह भी कहा गया है कि अगर चैनल केवल किसी अभिभावक की शिकायत को तथ्यात्मक रूप से रिपोर्ट करते तो यह खबर की श्रेणी में आता, लेकिन शिकायत को आधार बनाकर स्टूडियो बहस चलाना, आरोप गढ़ना और साम्प्रदायिक नैरेटिव बनाना प्रसारण संहिता का उल्लंघन है। NBDSA के अनुसार इस तरह की रिपोर्टिंग भारत के संविधान में निहित धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के भी खिलाफ है।
अथॉरिटी ने निर्देश दिया है कि सभी विवादित प्रसारण चैनलों की वेबसाइट, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से हटाए जाएं और तय समय सीमा के भीतर इसकी अनुपालन रिपोर्ट सौंपी जाए। यह फैसला एक बार फिर इस सवाल को केंद्र में लाता है कि टीवी न्यूज़ चैनलों द्वारा टीआरपी और एजेंडा के नाम पर किस हद तक जिम्मेदार पत्रकारिता की अनदेखी की जा रही है





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