आदरणीय बड़े भैया-राहुल मिश्रा जी (संपादक_Media4samachar)
सादर प्रणाम।
भैया, अत्यंत व्यथा और मजबूरी में यह पत्र लिख रहा हूँ। संस्थान में नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी तरह से नियमों के विरुद्ध चल रही थी। केवल ऑफर लेटर के आधार पर लोगों की जॉइनिंग कराई जा रही थी, जबकि ऑफर लेटर में स्पष्ट रूप से लिखा है कि आवश्यक दस्तावेज एवं औपचारिक एग्रीमेंट पूर्ण होने के बाद ही जॉइनिंग लेटर जारी किया जाएगा।
मैंने लगातार मिलकर, मेल करके और मौखिक रूप से निवेदन किया कि जब तक कर्मचारियों के सभी दस्तावेज और एग्रीमेंट पूरे न हो जाएँ, तब तक उन्हें संस्थान में कार्य प्रारंभ न कराया जाए। इसके बावजूद लगभग 45 लोगों को बिना पूर्व जानकारी और बिना प्रबंधन की स्वीकृति के राणा यशवंत द्वारा संस्थान से जोड़ दिया गया।
यदि संख्या 4–5 लोगों तक सीमित होती तो व्यक्तिगत स्तर पर समझाकर समाधान निकाल लिया जाता, लेकिन 45 लोगों की एक साथ उपस्थिति ने स्थिति को गंभीर बना दिया। न्यूज़ रूम में सामूहिक रूप से उपस्थित इन लोगों को स्पष्ट रूप से कहना पड़ा कि जब तक आपके दस्तावेज पूर्ण नहीं होते, तब तक संस्थान सैलरी अथवा किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी लेने की स्थिति में नहीं है। आप सभी को व्यक्तिगत रूप से श्री राणा जसवंत जी द्वारा रखा गया है, अतः उनकी नियुक्ति और वेतन की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी; संस्थान की कोई आधिकारिक जिम्मेदारी नहीं होगी।
दूसरी ओर, संस्थान के पुराने कर्मचारियों को बिना किसी नोटिस पीरियड और बिना प्रबंधन को सूचित किए हटा दिया गया। यह निर्णय भी एकतरफा लिया गया। पुराने कर्मचारियों को सम्मानजनक विदाई तक नहीं दी गई। भैया, कोई भी व्यक्ति यदि आर्थिक रूप से कमजोर होकर नौकरी कर रहा हो और उसे बिना पूर्व सूचना के निकाल दिया जाए, तो वह दुआ देगा या बद्दुआ — यह हम सभी समझ सकते हैं।
मैं स्वयं नियमित रूप से चैनल के संचालन में उपस्थित नहीं रहता, लेकिन बार-बार यह आग्रह करता रहा कि प्रक्रिया और नियमों का पालन हो। मैंने यह भी कहा कि यदि सभी को रखना है तो रखें, मुझे कोई आपत्ति नहीं; परंतु बिना दस्तावेज और बिना वैधानिक प्रक्रिया के नियुक्ति न की जाए। फिर भी मेरी बातों को अनसुना कर दिया गया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म — ट्विटर, फेसबुक और यूट्यूब — पर भी आप देख सकते हैं कि श्री राणा जी और उनकी टीम के अतिरिक्त अन्य कोई खबर प्रमुखता से प्रकाशित नहीं की गई। जिसने भी असहमति जताई या उनकी बात नहीं मानी, उसे तत्काल हटा दिया गया।
भैया, संस्थान कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है कि बिना चर्चा, बिना सहमति और बिना प्रक्रिया के इतने बड़े निर्णय लिए जाएँ। मालिकाना हक और प्रबंधन की जिम्मेदारी में अंतर होता है। निर्णय लेने से पहले संवाद और पारदर्शिता आवश्यक होती है।
मैंने आज तक ऐसा व्यक्ति नहीं देखा जो हर स्थिति में गलत को भी सही सिद्ध करने का प्रयास करे। मेरी आपसे विनती है कि आप इस पूरे विषय को गंभीरता से पढ़ें, समझें और निष्पक्ष रूप से विचार करें।
मेरा उद्देश्य किसी का अपमान करना नहीं, बल्कि संस्थान की साख और अपनी प्रतिष्ठा की रक्षा करना है।
आपका छोटा भाई,
शैलेंद्र शर्मा (चेयरमैन) न्यूज इंडिया चैनल


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