पत्रकार के लिए टीवी चैनल में करने को बहुत कुछ बचा नहीं.. रहा नहीं..
यही वजह है बड़े-बड़े नामचीन पत्रकार अब खुद को चैनल की बेड़ियों, मालिकों के दबाव और असाइनमेंट की अवांछनीय इच्छाओं से मुक्त कर रहे हैं..
सीधे शब्दों में कहें तो गुलामी की जंजीरें तोड़कर खुद को आजाद कर रहे हैं.
ऐसे खाँटी पत्रकार जनता के बीच जनता के मुद्दे उठाने की तैयारी कर रहे हैं.. जनता की आवाज बन रहे हैं..
ऐसे ही एक धुरंधर पत्रकार रोहित सांवल जी ने भी बेड़ियां तोड़ दी हैं.. उन्होंने एबीपी न्यूज छोड़ दिया है..
रोहित सांवल सर एबीपी में मेरे संपादक रहे.. एक शानदार पत्रकार हैं.. उन्होंने मुझे खुलकर काम करने की आजादी दी.. आज के दौर में टीवी चैनल में इस तरह की खबरें दिखाना बड़े साहस का काम होता है जिस तरह की खबरों पर रोहित सर ने मुझसे काम कराया. टीवी में एक पत्रकार के तौर पर उन्होंने मुझे स्थापित करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी.
एबीपी गंगा न्यूज़ चैनल को यूपी का नंबर वन चैनल बनाने में उनके नए-नए आइडिए, उनकी रचनात्मकता और निर्भीकता हमेशा चर्चा में रहती है. उन्होंने सारे चैनलों को पछाड़कर एबीपी गंगा को सर्वश्रेष्ठ चैनल के रूप में स्थापित किया. उनका रात 8 बजे का शो “बात तो चुभेगी” आज भी सबको याद आता है..






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