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वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय पर गाजियाबाद मे FIR,देर रात गिरफ्तारी के लिए घर पहुंची पुलिस

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गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासनिक कामकाज पर तीखी खोजी रिपोर्टिंग को लेकर चर्चा में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की मुश्किलें कम होती नहीं दिख रही हैं। लखनऊ में दर्ज मामले के बाद अब गाजियाबाद के इंद्रापुरम थाने में उनके खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की गई है। मुकदमा दर्ज होते ही देर रात करीब 7-8 पुलिसकर्मियों की टीम उनके आवास पर पहुंच गई हैं

शिप्रा मॉल के पास रोड रेज का आरोप, धाराएं गंभीर

अभिषेक उपाध्याय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, पुलिस की यह कार्रवाई एक कथित ‘रोड रेज’ और गाली-गलौज की शिकायत पर आधारित है।

​उन्होंने घटना की पृष्ठभूमि बताते हुए दावा किया:

  • ​गत 18 तारीख को एक व्यक्ति मोटरसाइकिल से आया और उसने शिप्रा मॉल के पास उनकी कार को हल्का सा टच (टक्कर) किया।
  • ​इसके तुरंत बाद उस व्यक्ति ने आपातकालीन सेवा ‘112’ पर कॉल कर पुलिस बुलाई।
  • ​इसी घटना को आधार बनाकर अब इंद्रापुरम थाने में गंभीर धाराओं के तहत आपराधिक मामला दर्ज कर लिया गया है।

घटना को बताया ‘प्लांटेड’, पुलिस को सीसीटीवी जारी करने का चैलेंज

पूरे घटनाक्रम को साजिशन रचा हुआ बताते हुए पत्रकार ने आरोप लगाया कि यह किसी वेल-फाइन स्क्रिप्ट की तरह पहले से ‘प्लांट’ किया गया मामला है। उन्होंने पुलिस की नीयत पर सवाल उठाते हुए सीधा चैलेंज दिया:

“मैं गाजियाबाद पुलिस को चुनौती देता हूँ कि उस कथित एक्सीडेंट का CCTV फुटेज जारी कर दे, पुलिस चेहरा दिखाने लायक़ नहीं बचेगी।”

 

सरकार पर बोला हमला, फ़ैज़ की पंक्तियों से चेताया

पत्रकार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार में हो रहे कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को उजागर करने की वजह से उन्हें लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि तमाम मामलों के बाद भी जब कुछ नहीं हो सका, तब इस तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं।

​पोस्ट के अंत में उन्होंने शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की मशहूर पंक्तियों को उद्धृत करते हुए लिखा— “वक्त सबका बदलता है और वक्त सबका आता है… लाज़िम है कि हम भी देखेंगे।”

कानूनी स्थिति और आगे का घटनाक्रम

गौरतलब है कि इससे पहले भी पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर सर्वोच्च अदालत ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए पुलिस को दंडात्मक कार्रवाई से राहत दी थी। ताजा मामले में गाजियाबाद पुलिस के आधिकारिक रुख और आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।

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Author: media4samachar

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