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राणा यशवंत का एंकर-विरोधी चेहरा:अनुभवी महिला एंकर्स को बताया ‘कूड़ा-कचरा’,अपनों को सेट करने के लिए मर्यादा तार-तार

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नोएडा/लखनऊ: फेसबुक लाइव पर आकर ‘पत्रकार हितों’ की बड़ी-बड़ी बातें करना और स्क्रीन के पीछे उन्हीं पत्रकारों के वजूद को पैरों तले रौंदना—क्या यही राणा यशवंत की पत्रकारिता का असली चेहरा है? हाल ही में उनके द्वारा किए गए लाइव संबोधन के बाद संस्थान के भीतर से जो आक्रोश फूट रहा है, वह उनके ‘मसीहा’ वाले मुखौटे को उतारने के लिए काफी है।
​संस्थान के भीतर से उठते ये सवाल राणा यशवंत की कार्यशैली और उनकी ‘फेवरेटिज्म’ (पक्षपात) की नीति पर गहरा प्रहार करते हैं:

1. विनोद मंडल का अपमान: क्या 29 साल का अनुभव ‘कूड़ा-कचरा’ है?

​राणा यशवंत जी, 1997 से न्यूज़ चैनलों की नींव रखने वाले श्री विनोद मंडल (PCR हेड) जैसे अनुभवी व्यक्ति के लिए “कूड़ा-कचरा” जैसे शब्दों का प्रयोग किस नैतिकता के तहत किया गया? आरोप है कि उन्हें अपमानित कर निकालने का एकमात्र उद्देश्य आपके ‘चेले’ नवीन को फिट करना था। नवीन जी को उनसे 3 गुना ज्यादा सैलरी पर रखना यह साबित करता है कि आपके दरबार में ‘काबिलियत’ नहीं, बल्कि ‘जी-हजुरी’ का इनाम मिलता है।

​2. असाइनमेंट हेड आशीष और सतीश त्रिपाठी का ‘कनेक्शन’

​पिछले 10 वर्षों से विभिन्न चैनलों में अपनी योग्यता साबित करने वाले आशीष (असाइनमेंट हेड) को भरी मीटिंग में अभद्रता का शिकार क्यों होना पड़ा? क्या यह एक सोची-समझी रणनीति थी ताकि वे खुद रास्ता छोड़ दें? उनकी जगह सतीश त्रिपाठी को दोगुनी सैलरी पर लाना आपकी ‘अपनों को उपकृत’ करने वाली नीति का सबसे बड़ा उदाहरण है। सतीश जी का पिछला ट्रैक रिकॉर्ड क्या है, यह जगजाहिर है, लेकिन आपकी निकटता ने उन्हें ‘योग्य’ बना दिया।

3. महिला एंकर्स का अपमान और ‘कचरा’ शब्दावली

​एक संपादक के रूप में भाषा की मर्यादा की दुहाई देने वाले राणा यशवंत ने पूर्व में कार्यरत महिला एंकर्स को “कूड़ा-कचरा” कहकर संबोधित किया। इन अनुभवी एंकर्स को हटाकर अपने करीबियों को ‘सेट’ करने की आपकी यह शैली क्या पत्रकारिता की गरिमा को शोभा देती है? ऐसी कौन सी अद्भुत शैली उन नए एंकर्स में है, जो पुराने चेहरे आपको ‘कचरा’ नजर आने लगे?
​राणा यशवंत से सीधे सवाल:
​क्या ‘पत्रकार हित’ का मतलब सिर्फ अपनी निजी ‘मंडली’ को भारी वेतन पर एडजस्ट करना है?
​क्या अनुभवी पत्रकारों को जलील करना आपके ‘न्यू मीडिया कल्चर’ का हिस्सा है?
​फेसबुक लाइव पर आदर्शवाद का पाठ पढ़ाने वाले राणा जी में इन दर्जनों उदाहरणों पर सार्वजनिक सफाई देने का साहस है?

निष्कर्ष:

यह रिपोर्ट उन दर्जनों पत्रकारों की आवाज है जो राणा यशवंत की ‘सेटिंग पॉलिसी’ के शिकार हुए हैं। जब तक संपादकीय कुर्सियों पर बैठकर ‘अपने लोगों’ को मलाई खिलाने के लिए काबिल पत्रकारों का मानसिक कत्ल होता रहेगा, तब तक राणा यशवंत जैसे लोगों का ‘पत्रकार हितैषी’ बनना सिर्फ एक भद्दा मजाक ही रहेगा।

​संपादकीय टिप्पणी:

Media4samachar तथ्यों और पीड़ित पक्ष की आवाज के साथ खड़ा है

Disclaimer: न्यूज इंडिया चैनल में राणा यशवंत से परेशान पीड़ित पत्रकार द्वारा मीडिया4समाचार को भेजे गए मेल के अनुसार

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Author: media4samachar

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