नई दिल्ली/लखनऊ: कोरोना काल की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में शुरू हुआ दैनिक समाचार पत्र ‘अमृत विचार’ इन दिनों कथित तौर पर आंतरिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। सूत्रों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ दावों की मानें तो, अखबार के प्रबंधन और संपादकीय स्तर पर हुए कुछ फैसलों ने संस्थान की स्थिरता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
संपादकीय नेतृत्व में बदलाव का असर?
चर्चा है कि पूर्व प्रधान संपादक शंभू दयाल वाजपेयी के संस्थान से अलग होने के बाद से अखबार की साख और सर्कुलेशन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। नए नेतृत्व (पार्थो कुनाल और राजेश श्रीनेत) के आने के बाद अखबार की कार्यप्रणाली में बदलाव आए, जिसे कुछ जानकार अखबार के ग्राफ में गिरावट की वजह मान रहे हैं। अपुष्ट खबरों के अनुसार, जो अखबार कभी 60-70 हजार की प्रसार संख्या का दावा करता था, वह अब काफी नीचे आ गया है।
वेतन विसंगति और कर्मचारियों में आक्रोश
संस्थान के भीतर से आ रही खबरों में सबसे गंभीर आरोप ‘सैलरी इम्बैलेंस’ (वेतन विसंगति) को लेकर हैं। आरोप है कि जहाँ एक ओर कुछ उच्चाधिकारियों और चहेते कर्मचारियों के वेतन में भारी बढ़ोतरी की गई, वहीं जमीनी स्तर पर काम करने वाले पुराने कर्मचारियों की अनदेखी हुई। सूत्रों का दावा है कि वेतन न बढ़ने और प्रबंधन के रवैये से नाराज होकर जनवरी और फरवरी के महीनों में कई वरिष्ठ साथियों ने इस्तीफा दे दिया है।
प्रबंधन पर ‘होल्ड’ और टालमटोल के आरोप
इस्तीफा दे चुके और वर्तमान में कार्यरत कुछ कर्मचारियों का आरोप है कि प्रबंधन बकाया भुगतान (Dues) को लेकर टालमटोल कर रहा है। एचआर विभाग की भूमिका को लेकर भी कर्मचारियों में असंतोष देखा जा रहा है।
Media4samachar की टिप: “किसी भी मीडिया संस्थान की मजबूती उसके पत्रकारों और कर्मचारियों की संतुष्टि पर टिकी होती है। ‘अमृत विचार’ जैसे उभरते अखबार के लिए ये आंतरिक मतभेद लंबी अवधि में नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।”
Disclaimer: यह लेख सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं और सूत्रों के दावों पर आधारित है। Media4samachar इस जानकारी की पूर्ण सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।





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