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‘चमकता नोएडा’ और सिसकती पत्रकारिता—आखिर कहाँ जाए आम पत्रकार ?

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तनुश्री सचदेव Media4samachar डेस्क

​नोएडा की ऊंची इमारतों में बसे चकाचौंध से भरे न्यूज रूम्स के भीतर इन दिनों एक ऐसा घुटन भरा माहौल पनप रहा है, जिस पर मुख्यधारा का मीडिया अक्सर खामोश रहता है। ताज़ा उदाहरण ‘इंडिया डेली’ न्यूज चैनल से सामने आया है, जहाँ स्पोर्ट्स डेस्क के अनुभवी पत्रकार प्रवीन मिश्रा का इस्तीफा महज एक व्यक्ति का जाना नहीं, बल्कि मीडिया संस्थानों की सड़ती व्यवस्था का एक और सबूत है।

इस्तीफों की झड़ी और प्रबंधन की चुप्पी

​जब किसी संस्थान से एक के बाद एक इस्तीफे होने लगें, तो समझ लेना चाहिए कि पानी सिर से ऊपर जा चुका है। ‘इंडिया डेली’ में पिछले कुछ दिनों से जो चल रहा है—चाहे वह महिला पत्रकार का इस्तीफा हो या अब प्रवीन मिश्रा का—वह सीधे तौर पर ‘मैनेजमेंट की मनमानी’ की ओर इशारा करता है। आखिर ऐसा क्या है कि जो पत्रकार दिन-रात दूसरों के हक की लड़ाई टीवी पर लड़ते हैं, वे अपने ही संस्थान में इतने मजबूर हो जाते हैं कि उन्हें नौकरी छोड़ना ही एकमात्र रास्ता दिखता है?

दबाव, मनमानी और ‘टारगेट’ का खेल

​आजकल न्यूज चैनलों में पत्रकारिता कम और ‘कॉर्पोरेट गुलामी’ ज्यादा करवाई जा रही है। काम का बेतहाशा दबाव, शिफ्टों में अनिश्चितता और प्रबंधन का तानाशाही रवैया पत्रकारों को मानसिक रूप से तोड़ रहा है। ‘इंडिया डेली’ जैसे संस्थानों में बढ़ता यह दबाव उन लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है जो पत्रकारिता के जुनून में अपना घर-बार छोड़कर नोएडा आते हैं।

एक बड़ा सवाल: परिवार कैसे चलेगा?

​सबसे दर्दनाक पहलू वह है जिसका जिक्र अक्सर फाइलों में दब जाता है। नोएडा जैसे महंगे शहर में, जहाँ कमरे का किराया और बच्चों की फीस ही कमर तोड़ देती है, वहां एक पत्रकार का इस्तीफा केवल उसकी नौकरी नहीं छीनता, बल्कि पूरे परिवार के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा देता है।

  • क्या संस्थान के चेयरमैन और बड़े पदों पर बैठे लोग कभी यह सोचते हैं कि उनके द्वारा बनाया गया ‘अनावश्यक दबाव’ किसी का चूल्हा बुझा सकता है?
  • क्या मीडिया में अब केवल वही टिक पाएगा जो जी-हुजूरी करेगा?

निष्कर्ष

​पत्रकारों का इस तरह टूटना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के लिए खतरे की घंटी है। यदि ‘इंडिया डेली’ और इसके जैसे अन्य संस्थान अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं करते, तो वह दिन दूर नहीं जब काबिल लोग इस पेशे से किनारा कर लेंगे। Media4samachar का मानना है कि पत्रकारों का शोषण बंद होना चाहिए, क्योंकि एक डरा हुआ और परेशान पत्रकार कभी सच नहीं दिखा सकता।

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Author: media4samachar

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