Home » सियासत » सुप्रीम कोर्ट का आया ऐतिहासिक फैसला: महिला के साथ ऐसी हरकत करना अब रेप की कोशिश ही माना जाएगा,हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया

सुप्रीम कोर्ट का आया ऐतिहासिक फैसला: महिला के साथ ऐसी हरकत करना अब रेप की कोशिश ही माना जाएगा,हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त किया

27 Views

एड.राहुल मिश्रा संपादक: Media4samachar उच्च न्यायालय लखनऊ

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने रेप की कोशिश के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है और कहा है कि जब मामला किसी ऐसे पीड़ित से जुड़ा हो, जो बेबस है तो कोर्ट को संवेदशील होकर फैसला सुनाना चाहिए.

Supreme Court : किसी महिला के पायजामे का नाड़ा खोलना या तोड़ना और उसके शरीर को गलत तरीके से छूना रेप की कोशिश ही माना जाएगा है. भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने यह फैसला सुनाया है और इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को निरस्त कर दिया है, जिसमें किसी महिला के पायजामे के नाड़े को खोलना महज रेप करने की तैयारी बताया गया था.

रेप की कोशिश और रेप की तैयारी में है फर्क

सुप्रीम कोर्ट ने यह माना है कि किसी महिला के पायजामे के नाड़े को खोलना रेप की कोशिश ही माना जाएगा ना कि रेप की तैयारी. इस संबंध में झारखंड हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जो व्यवस्था थी है उसके तहत पायजामे का नाड़ा खोलना रेप की कोशिश है, अगर इसे तैयारी के तौर पर भी देखा जाए, तो यहां यह समझना जरूरी है कि आखिर वह व्यक्ति ऐसा क्यों कर रहा था, उसके पीछे की वजह क्या थी? इस सवाल का जवाब स्पष्टत: यह है कि वह रेप करना चाह रहा था. भारतीय न्याय संहिता में रेप की परिभाषा स्पष्ट तौर पर दी गई है और संभवत: कोर्ट ने उसी परिभाषा के तहत इसे रेप की कोशिश माना है. अधिवक्ता अवनीश रंजन मिश्रा बताते हैं कि बीएनएस की धारा 351 में यह बताया गया है कि आरोपी व्यक्ति अगर रेप की तैयारी करे, तो उसके लिए उसे सजा कम होगी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 मार्च 2025 को यह फैसला सुनाया था कि अगर किसी महिला के पायजामे के नाड़े को तोड़ा या खोला जाए तो उसे रेप की कोशिश नहीं बल्कि रेप करने की तैयारी माना जाएगा. इस अपराध में सजा कम होती है क्योंकि इसे एक महिला की इज्जत को ठेस पहुंचाने वाला माना जाता है ना कि रेप की कोशिश. इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद काफी हो हल्ला मचा और सीनियर एडवोकेट शोभा गुप्ता के एक पत्र के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का खुद संज्ञान लिया और मंगलवार को यह फैसला सुनाया.

पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया मामला

  1. चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त किया और 11 साल की बच्ची के साथ हुए यौन अपराध के प्रति पाॅक्सो एक्ट के तहत दो लोगों पर मामला चलाने की पेशकश की. कोर्ट ने कहा कि इस तरह के अपराधों में विशेष संवेदनशील होने की जरूरत है. अपने फैसले में कोर्ट ने कहा कि जजों को फैसला सुनाते हुए इस तरह के मामलों में सिर्फ संविधान और कानून का ही ध्यान नहीं रखना चाहिए बल्कि माहौल और पीड़ितों की स्थिति पर भी संवेदशीलता के साथ विचार करना चाहिए.

 

media4samachar
Author: media4samachar

Live Cricket

Daily Astrology