अभिषेक उपाध्याय (वरिष्ठ पत्रकार)
एक राष्ट्रीय चैनल में गदर कटी हुई है।
पहले चैनल के प्रोडक्शन हेड ने पार्किंग के विवाद में एक कंपनी के सीईओ से बुरी तरह मारपीट की।
ऐसा मारा कि सामने वाला लहूलुहान हो गया।
बड़ी मुश्किल से, ‘विशाल’ दबाव बनाकर बीच बचाव करवाया जा सका,
फिर भी मामले को पूरी तरह से मैनेज न कर मिला और चैनल की इज्जत 151 का चालान बन गई।
इस सबके बीच टीआरपी में भी चैनल की ऐसी ‘रजनी’ यानि रात्रि हो चुकी है कि अब कोई भी ‘ईश’ यानि ईश्वर उसे उबार नहीं सकता है।
आज ही आई TRP में चैनल इस तरह से मुंह के बल गिरा है जैसे सनी देवल की फिल्म में घूंसा खाकर विलेन के मुंह से गिरे आगे के दो दांत।
चैनल इस बीच एक खास वजह से भी चर्चा में था।
सूत्र बताते हैं कि चैनल के तबले सरीखे पेट वाले संपादक की ‘बलून’ यानि गुब्बारे से नजदीकियों ने,
सरकार के एक बहुत ही वरिष्ठ अधिकारी के बारे में अफवाह फैलाने में बड़ा योगदान दिया है।
मधुर भंडारकर के जूते के सोल नाम से मशहूर एक लाइजनर कम कथित पत्रकार और नए बने एंकर ने भी,
फर्जी अफवाहों की इस मंडी को गरम करने में उसी तरह योगदान दिया,
जैसे सनी लियोनी की फिल्मों को देखते हुए सिनेमाहॉल की सबसे आगे की सीट पर बैठा हुआ दर्शक वर्ग,
अपने ख्वाबों में ही गर्म तवे की तरह जलते हुए एकदम से हिलना-डुलना शुरू कर देता है।
चैनल की स्थिति इन दिनो यूपी पुलिस की उस बहुचर्चित तस्वीर सरीखी हो चुकी है,
जहां पिस्टल के फेल होने के बाद पुलिस वाले मुंह से ही ठांय-ठांय शुरू कर देते हैं!!
(ये स्वप्न पर आधारित एक वाकया है, जो अगर सही निकले तो स्वप्न देखने वाले को ब्रह्राज्ञानी समझा जा सकता है। )





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