
भोपाल/कानपुर: मध्य प्रदेश के न्यूज चैनल IND 24 से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। खबर है कि 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के अवसर पर विज्ञापन का लक्ष्य (Target) पूरा न करने और कथित तौर पर आदेश न मानने का हवाला देते हुए चैनल के इनपुट एडिटर सुमित मिश्रा ने दो पत्रकारों को सेवा से बाहर कर दिया है।
बिना नोटिस कार्रवाई का आरोप
निकाले गए पत्रकारों में कानपुर के रिपोर्टर अदीप हसन और बांदा के जिला संवाददाता रिजवान शामिल हैं। पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या कारण बताओ नोटिस के अचानक चैनल से हटा दिया गया है।
’Media4samachar’ से विशेष बातचीत
Media4samachar से विशेष बातचीत के दौरान अदीप हसन और रिजवान ने अपना पक्ष रखते हुए कहा:
”मैनेजमेंट और इनपुट एडिटर का कहना है कि 26 जनवरी के विज्ञापन के लिए कहा गया था, लेकिन हमने कोई रिस्पांस नहीं दिया और न ही विज्ञापन लाए। साथ ही खबरें न भेजने का भी आरोप लगाया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि हम नियमित रूप से खबरें भेज रहे हैं। कुल मिलाकर, विज्ञापन का दबाव न झेल पाने और टारगेट पूरा न होने के कारण हमें निशाना बनाया गया है।”
पत्रकारिता की नैतिकता पर सवाल
यह मामला एक बार फिर मुख्यधारा के मीडिया में पत्रकारों पर बढ़ते व्यावसायिक दबाव को उजागर करता है। सवाल यह उठता है कि क्या एक पत्रकार की योग्यता अब खबरों की जगह केवल विज्ञापन लाने की क्षमता से मापी जाएगी? बिना किसी लिखित आदेश या नोटिस के पत्रकारों को हटाना श्रम कानूनों और पत्रकारिता की गरिमा का उल्लंघन माना जा रहा है।





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