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जागरण मीडिया ग्रुप में मचा हड़कंप: 8 निदेशकों की छुट्टी की तैयारी,बोर्ड रूम में छिड़ी ‘जंग’

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​नई दिल्ली/कानपुर: देश के प्रतिष्ठित मीडिया हाउस जागरण प्रकाशन लिमिटेड (JPL) में शीर्ष स्तर पर खींचतान अब एक बड़े कॉर्पोरेट युद्ध का रूप ले चुकी है। कंपनी की प्रमोटर और होल्डिंग इकाई, जागरण मीडिया नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड (JMNIPL) ने एक कड़ा कदम उठाते हुए बोर्ड के 8 बड़े चेहरों को बाहर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

इन दिग्गजों पर गिरी गाज

​होल्डिंग कंपनी ने विशेष नोटिस जारी कर 7 स्वतंत्र निदेशकों और 1 पूर्णकालिक निदेशक को हटाने का प्रस्ताव रखा है। हटाए जाने वाले स्वतंत्र निदेशकों की सूची में शामिल हैं:

  • ​दिव्या करणी
  • ​शैलेन्द्र स्वरूप
  • ​अनीता नय्यर
  • ​केमिशा सोनी
  • ​प्रमोद अग्रवाल
  • ​शालिन टंडन
  • ​अरुण अनंत

​इनके अलावा, फुल-टाइम डायरेक्टर सतीश चंद्र मिश्रा को भी पद से हटाने की सिफारिश की गई है।

विवाद की जड़: नियुक्तियों में खामी और वोटिंग राइट्स

​JMNIPL का आरोप है कि इन निदेशकों की नियुक्ति की प्रक्रिया में गंभीर खामियां थीं। इसके अलावा, विवाद का सबसे बड़ा केंद्र चेयरमैन महेंद्र मोहन गुप्ता के वोटिंग अधिकार बन गए हैं। होल्डिंग कंपनी का दावा है कि चेयरमैन ने JMNIPL बोर्ड के निर्देशों के अनुसार अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया।

महेंद्र मोहन गुप्ता का पलटवार

​दूसरी ओर, महेंद्र मोहन गुप्ता ने इन आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाया है। उन्होंने बोर्ड को सूचित किया है कि वोटिंग अधिकारों से जुड़ा यह पूरा मामला फिलहाल नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), इलाहाबाद बेंच के समक्ष विचाराधीन है। उन्होंने संकेत दिया है कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आता, इस तरह के बदलावों पर कानूनी सवाल बने रहेंगे।

आगे क्या होगा?

    1. EGM की मांग: होल्डिंग कंपनी ने शेयरधारकों की एक्स्ट्राऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाने की मांग की है। इसी मीटिंग में निदेशकों के भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
    2. कानूनी प्रक्रिया: 12 फरवरी को हुई बोर्ड बैठक के बाद कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि वह इस मामले में कानूनी विशेषज्ञों की राय ले रही है।
    3. बाजार पर असर: विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमोटरों के बीच की यह लड़ाई कंपनी के गवर्नेंस और बाजार में उसकी साख को प्रभावित कर सकती है।

विशेषज्ञ की राय: “किसी भी लिस्टेड कंपनी में जब प्रमोटर और चेयरमैन के बीच इस तरह का टकराव होता है, तो निवेशकों का भरोसा डगमगाता है। अब सबकी नजरें NCLT के अगले रुख पर टिकी हैं।”

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Author: media4samachar

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