दीपावली खुशियों का त्यौहार है जो खुद से ज्यादा दूसरों को खुशियां देने के लिए ही मनाया जाता है। दीपावली में कंपनी या संस्था में काम करने वाले कर्मचारियों को भी कंपनी की ओर से बोनस के साथ-साथ मिठाईयां और तरह-तरह के उपहार दिए जाते हैं। चंडीगढ़ में फार्मास्यूटिकल कंपनी ने तो सारे रिकार्ड तोड़ दिए। अपने 51 कर्मचारियों को रैंक के हिसाब से गाड़ियां उपहार में दी हैं। वहीं मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित अखबारों में शामिल नईदुनिया जो कि देश के बड़े दैनिक जागरण ग्रुप का अभिन्न अंग होने के बावजूद छोटा सा दिल रखता है।
दीपावली जैसे त्यौहार पर भी अपने कर्मचारियों को उपहार तो छोड़ो मुंह मीठा भी नहीं करा पाया। ऐसा पहली बार नहीं कई सालों से होता आ रहा है। सूत्रों से जानकारी मिली है कि विगत दो वर्षों से हेड आफिस संस्थाओं को मिठाई और उपहार भेज रहा है। लेकिन स्थानीय प्रबंधकों का अनोखा प्रबंधन है, या यूं कहा जाए कि ‘अपना-अपना पेट भरना’ जिससे मिठाई व उपहार कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पाते हैं।
इस कारण नईदुनिया समूह के संपादकीय सहित अन्य विभाग के कर्मचारियों में खासा आक्रोश व्याप्त है। क्योंकि बोनस भी नियमों के चक्रव्यूह में फंसा है जिससे कई कर्मचारी प्रभावित हैं इसमें कुछ कर्मचारियों को बोनस मिल पाता है और कईयों को नहीं। ऐसे में त्योहार पर मिठाई और उपहार न मिलना कर्मचारिेयों में निराशा पैदा करता है। इस घटना से नईदुनिया की अखबार जगत में थू-थू हो रही है।
कंपनी कोई भी हो, उसमें काम करने वाला बड़े ओहदे रखने वालों से लेकर चपरासी से मैसेंजर तक सभी का अहम रोल होता है, लेकिन यहां तो बड़े ओहदे रखने वालों को तो त्योहार पर खूब शुभकमनाओं के नाम पर संस्थान और गैर संस्थानों से दीपावली का उपहार मिल ही जाता है, लेकिन जो सेकेंड-थर्ड और फोर्थ ग्रेड के कर्मचारी है, उनको बाहर तो क्या अपना संस्थान ही उपेक्षा करने में लगा हुआ है, इससे जहां कंपनी की इमेज तो खराब हो ही रही है, साथ ही इसी तरह का माहौल लंबे समय तक रहा तो संस्थान का माहौल भविष्य में डूबने वाले सूरज की तरह होने वाला है।




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