नई दिल्ली | 18 फरवरी, 2026
भारतीय मीडिया जगत के सबसे दिग्गज चेहरों में से एक और ‘इंडिया टीवी’ के चेयरमैन व एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा आज अपना 69वां जन्मदिन मना रहे हैं। चार दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने न केवल समाचारों को पेश करने का तरीका बदला, बल्कि भारतीय टेलीविजन को ‘आप की अदालत’ जैसा ऐतिहासिक शो देकर पत्रकारिता के नए मानक स्थापित किए।
संघर्ष से सफलता की कहानी
18 फरवरी 1957 को दिल्ली के एक साधारण परिवार में जन्मे रजत शर्मा का शुरुआती जीवन चुनौतियों भरा रहा। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से पढ़ाई के दौरान ही उनके नेतृत्व कौशल की झलक मिल गई थी, जब 1977 में वे दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के महासचिव चुने गए।
‘आप की अदालत’ और टेलीविजन क्रांति
1993 में रजत शर्मा ने ‘आप की अदालत’ की शुरुआत की। कोर्टरूम के फॉर्मेट में तीखे सवालों और चेहरे पर मुस्कान के साथ मेहमानों को घेरने की उनकी कला ने इस शो को घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। यह भारत के सबसे लंबे समय तक चलने वाले शोज में से एक है, जिसमें प्रधानमंत्री से लेकर बॉलीवुड के सुपरस्टार्स तक ‘कटघरे’ में नजर आ चुके हैं।
इंडिया टीवी और नेतृत्व
साल 2004 में उन्होंने इंडिया टीवी की स्थापना की और अपनी रणनीतिक सोच से इसे देश के सबसे प्रभावशाली न्यूज़ चैनलों में शामिल कराया। पत्रकारिता के प्रति उनकी निष्ठा का ही परिणाम है कि उन्हें:
- 2015 में भारत के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से नवाजा गया।
- सितंबर 2025 में उन्हें एक बार फिर न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एंड डिजिटल एसोसिएशन (NBDA) का अध्यक्ष चुना गया।
डिजिटल युग की चुनौतियाँ और नैतिकता
रजत शर्मा केवल पारंपरिक पत्रकारिता तक सीमित नहीं रहे। मई 2024 में उन्होंने डीपफेक तकनीक के गलत इस्तेमाल के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर कर यह साबित किया कि वे डिजिटल युग की नैतिक चुनौतियों के प्रति भी पूरी तरह सजग हैं।
संपादकीय टिप्पणी: रजत शर्मा का सफर आज के युवा पत्रकारों के लिए एक मिसाल है कि कैसे ईमानदारी, कड़ी मेहनत और सही दृष्टिकोण से सफलता के शिखर तक पहुँचा जा सकता है।





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