नई दिल्ली: देश के प्रतिष्ठित न्यूज़ चैनलों में शुमार NDTV एक बार फिर अपने आंतरिक बदलावों और कर्मचारियों की संभावित छंटनी को लेकर चर्चा में है। ताज़ा जानकारी के अनुसार, अडानी समूह के नेतृत्व वाले इस संस्थान ने हिंदी और अंग्रेजी दोनों डेस्क सहित विभिन्न विभागों के दर्जनों कर्मचारियों को परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) के नोटिस भेजे हैं।
इन विभागों पर गिरी गाज
सूत्रों के मुताबिक, यह नोटिस केवल डेस्क तक सीमित नहीं हैं। इसमें रिपोर्टर्स, एंकर्स, कैमरामैन, टीम हेड और पीसीआर (PCR) से जुड़े तकनीकी कर्मचारी भी शामिल हैं। एचआर विभाग की ओर से भेजे गए ई-मेल में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि संबंधित कर्मचारियों का प्रदर्शन ‘अपेक्षित स्तर’ का नहीं है, जिससे पूरी टीम की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है।
PIP या नौकरी से निकालने की तैयारी ?
कर्मचारियों को भेजे गए ई-मेल को एक ‘चेतावनी’ की तरह देखा जा रहा है। जिन्हें नोटिस मिला है, उन्हें 5 से 10 मार्च के बीच का समय दिया गया है।
नियम: यदि इस तय अवधि में प्रदर्शन में सुधार नहीं दिखता, तो प्रबंधन उनकी सेवाओं को समाप्त करने पर विचार कर सकता है।
असुरक्षा का माहौल: संस्थान के पुराने कर्मचारियों में इसे लेकर भारी डर है। पिछले साल अप्रैल में भी अप्रेज़ल से ठीक पहले लगभग 100 लोगों को PIP में डाला गया था, जिनमें से अधिकांश को बाद में बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
अडानी के अधिग्रहण के बाद लगातार बदलाव
दिसंबर 2022 में प्रणय रॉय और राधिका रॉय से हिस्सेदारी खरीदने के बाद से ही NDTV के वर्क कल्चर और स्ट्रक्चर में बड़े फेरबदल देखे गए हैं। अप्रैल 2025 में हुई पिछली छंटनी के दौरान भी यह आरोप लगे थे कि ‘पुराने NDTV’ की पहचान माने जाने वाले चेहरों और कर्मचारियों को टारगेट किया जा रहा है।
बदलते मीडिया परिदृश्य का संकेत
जानकारों का मानना है कि NDTV में हो रही यह हलचल भारतीय मीडिया जगत में बढ़ते ‘कॉर्पोरेट मॉडल’ का असर है। अब न्यूज़ रूम्स में पत्रकारिता के साथ-साथ ‘कॉस्ट कटिंग’ और ‘आउटपुट मैट्रिक्स’ को अधिक प्राथमिकता दी जा रही है।
इस कदम ने एक बार फिर मीडिया संस्थानों में काम करने वाले पत्रकारों की नौकरी की सुरक्षा और उनके भविष्य पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।




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