पूर्णिया (बिहार) से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने ‘लाइव टाइम्स’ (Live Times) के डायरेक्टर व वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया को 10 करोड़ रुपये की मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के अधिवक्ता कनिष्क अरोड़ा के माध्यम से भेजे गए इस नोटिस में दीपक चौरसिया पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने टीवी इंटरव्यू और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सांसद की छवि को धूमिल करने और उन्हें आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति दिखाने की नीयत से भ्रामक व मानहानिकारक सामग्री प्रसारित की है।
नोटिस में दीपक चौरसिया से 3 दिनों (72 घंटे) के भीतर बिना शर्त सार्वजनिक माफी मांगने और 10 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की गई है।
क्या है पूरा मामला? (लीगल नोटिस के मुख्य अंश)
- संसद परिसर का इंटरव्यू और उकसाने वाले सवाल: नोटिस के अनुसार, 30 जुलाई 2026 को सांसद पप्पू यादव संसद परिसर में एक जनहित के विरोध प्रदर्शन के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। उसी दौरान पत्रकार दीपक चौरसिया ने उनका इंटरव्यू लिया। आरोप है कि इंटरव्यू के दौरान वास्तविक मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय जानबूझकर उकसाने वाले और निजी सम्मान को ठेस पहुँचाने वाले सवाल पूछे गए।
- सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट व कैप्शन: नोटिस में कहा गया है कि इसके बाद 31 जुलाई और 1 अगस्त 2026 को दीपक चौरसिया ने अपने आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर इंटरव्यू के चुनिंदा हिस्से और तस्वीरें पोस्ट कीं। पोस्ट्स में सांसद के लिए “बाहुबली”, “रंगदारी, फिरौती, हत्या और संगठित अपराध के दर्जनों मामले”, और “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” जैसे कैप्शन्स व थंबनेल्स का इस्तेमाल किया गया।
- कानूनी स्थिति और सच को छुपाने का आरोप: सांसद के कानूनी सलाहकार का कहना है कि किसी जनप्रतिनिधि पर दर्ज मामलों की स्थिति या विचाराधीन मामलों (pending cases) के आधार पर मीडिया द्वारा उन्हें दोषी या सक्रिय अपराधी के रूप में पेश करना गैर-कानूनी है। पत्रकार ने मामलों की वास्तविक स्थिति को छुपाया और दर्शकों के सामने एक भ्रामक छवि बनाई।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत मानहानि: नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि पत्रकार का यह कृत्य भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 356 के तहत आपराधिक मानहानि का मामला बनाता है, जिससे सांसद के दशकों के राजनीतिक जीवन, साख और जनाधार को गंभीर क्षति पहुँची है।
लीगल नोटिस में की गई प्रमुख मांगें:
- सामग्री तुरंत हटाना: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’, यूट्यूब, वेबसाइट्स और अन्य सभी डिजिटल माध्यमों से सांसद पप्पू यादव के खिलाफ पोस्ट किए गए सभी मानहानिकारक वीडियो, ट्वीट्स, थंबनेल्स और कैप्शन्स को तत्काल हटाया/डिलीट किया जाए।
- सार्वजनिक माफीनामा: दीपक चौरसिया अपने सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ सहित सभी संबंधित प्लेटफॉर्म्स पर उसी प्रमुखता के साथ एक बिना शर्त सार्वजनिक माफीनामा (Unconditional Public Apology) जारी करें।
- भविष्य के लिए लिखित भरोसा: लिखित में शपथपत्र (Undertaking) दें कि भविष्य में सांसद के खिलाफ कोई भी झूठी या भ्रामक टिप्पणी या वीडियो प्रसारित नहीं किया जाएगा।
- 10 करोड़ का मुआवजा: सांसद की प्रतिष्ठा को पहुँची अपूरणीय क्षति के लिए ₹10,00,00,000 (दस करोड़ रुपये) की राशि क्षतिपूर्ति के रूप में चुकाई जाए।
- मूल साक्ष्य सुरक्षित रखना: इंटरव्यू के मूल वीडियो फुटेज, सोर्स फाइलें, एडिटेड वर्जन, स्क्रिप्ट और डिजिटल रिकॉर्ड्स को सुरक्षित रखा जाए, ताकि अदालत में इन्हें साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सके।
आगे की चेतावनी:
नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समयसीमा के भीतर इन मांगों का अनुपालन नहीं किया गया, तो सांसद पप्पू यादव सक्षम अदालत में दीवानी (Civil) और आपराधिक (Criminal) दोनों प्रकार की कानूनी कार्यवाही शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी दीपक चौरसिया की होगी।






Users Today : 37
Users Yesterday : 92