अभिषेक उपाध्याय (वरिष्ठ पत्रकार)
बड़ी ख़बर भी और बड़ा सवाल भी-
SHO पर एक्शन और ACP पर?
ABP पर?
ख़बर है कि महिला एडवोकट की अवैध कस्टडी और यौन उत्पीड़न मामले में नोएडा के सेक्टर 126 का SHO लाइन हाज़िर कर दिया गया है।
सोचिए, इतने भयावह मामले में महज लाइन हाज़िर करना भी कोई एक्शन है क्या?
ये तो ऐसा ही है जैसे क़त्ल के आरोपी को अहिंसा पर महात्मा गांधी का प्रवचन सुनाकर विश्राम करने घर भेज दिया जाए?
और उस ACP प्रवीण कुमार सिंह का क्या?
जिस पर संगीन आरोप है कि उसके ही निर्देशन में ये भयावह घटना हुई?
(हवाला- सुप्रीम कोर्ट मे दाखिल पिटीशन)
वही ACP जो गोरखपुर में CO रहते हुए सरकारी वर्दी में योगी आदित्यनाथ के आगे घुटनों पर बैठकर उनका तिलक करने और आशीर्वाद लेने की वजह से चर्चा में रहा!
उसका क्या?
ABP न्यूज के उस HOD विशाल शर्मा का क्या, जिसकी गुंडागर्दी का किस्सा सुप्रीम कोर्ट की पिटीशन का हिस्सा है।
विशाल शर्मा को ABP कब निकालकर बाहर करेगा?
कब ABP के ‘प्रभाव’ और ‘मिलीभगत’ से एक महिला एडवोकेट पर हुए भयावह सेक्सुअल असाल्ट की चैनल माफी मांगेगा?
(हवाला- सुप्रीम कोर्ट पिटीशन)
मैं बार-बार लिख रहा हूं कि अगर शक्ति मिली है तो इसके ‘महादुरूपयोग’ से बचिए,
क्योंकि शक्ति कभी किसी की होकर नहीं रही है।
कबीर दास ‘रमैनी’ में शक्ति के अहंकार के सिलसिले में रावण का उदाहरण देते हुए लिख गए हैं-
“एक लाख पूत सवा लख नाती,
ता रावण घर दिया न बाती”
(अर्थात एक लाख पुत्र और सवा लाख पोते वाले रावण के घर कोई दीपक जलाने वाला भी शेष था।
शक्ति के अहंकार का अंजाम एक रोज़ यही होता है।)
वक्त बदलेगा,
तो शक्ति के मद का ये सारा उफान कपड़े धोने के बाद शेष रह गए एरियल सर्फ के झाग की तरह बह जाएगा।
और याद रखिए। वक्त की ये आदत है, वो कभी टिककर नहीं रहता।
गुलज़ार लिख गए हैं-
“वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
इसकी आदत भी आदमी सी है!”





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