Atharv Dwivedi-Media4samachar Desk Noida
बॉलीवुड में खूबसूरती की परिभाषा अक्सर ग्लैमर, मेकअप और परफेक्ट लुक्स से जोड़ दी जाती है। लेकिन समय-समय पर कुछ अभिनेत्रियाँ ऐसी भी आई हैं जिन्होंने बिना ज्यादा बनावट और बिना ओवर-स्टाइलिंग के अपनी सादगी, आत्मविश्वास और अभिनय से “नेचुरल ब्यूटी” का अर्थ बदल दिया। अगर आलिया भट्ट, दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा को इस चर्चा से अलग रखें, तो बॉलीवुड में कई चेहरे ऐसे हैं जो असली, सहज और ज़मीन से जुड़ी खूबसूरती का प्रतिनिधित्व करते हैं।
नंदिता दास बॉलीवुड की उन अभिनेत्रियों में हैं जिन्होंने कभी भी ग्लैमर को प्राथमिकता नहीं दी। ‘फायर’, ‘अर्थ’ और ‘बावंदर’ जैसी फिल्मों में उनका लुक पूरी तरह स्वाभाविक रहा। सांवला रंग, बिना बनावट की सुंदरता और मजबूत व्यक्तित्व उन्हें एक अलग पहचान देता है। वे इस बात का उदाहरण हैं कि असली खूबसूरती आत्मविश्वास से आती है।
तिलोत्तमा शोम का चेहरा पारंपरिक बॉलीवुड नायिका जैसा नहीं है, लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उनकी नेचुरल ब्यूटी उनकी सादगी, भाव-भंगिमा और स्क्रीन पर मौजूदगी में दिखाई देती है। ‘सर’ और ‘मॉनसून वेडिंग’ जैसी फिल्मों में उनका वास्तविक और सहज लुक दर्शकों को बहुत सच्चा लगता है।
सान्या मल्होत्रा की खूबसूरती मासूमियत और ऊर्जा से भरी हुई है। ‘दंगल’ से लेकर ‘बधाई हो’ और ‘पगलैट’ तक, उनका लुक हमेशा सादा और दर्शकों से जुड़ा हुआ रहा है। वे बिना किसी बनावटी ग्लैमर के भी पर्दे पर सहज रूप से चमकती हैं।
तृप्ति डिमरी को हाल के वर्षों में नेचुरल ब्यूटी के तौर पर काफी सराहा गया है। ‘बुलबुल’ और ‘क़ला’ में उनका साफ, सौम्य और सधा हुआ रूप बेहद प्रभावशाली रहा। उनकी खूबसूरती शांत है, जो धीरे-धीरे असर करती है और लंबे समय तक याद रहती है।
निष्कर्ष
बॉलीवुड की नेचुरल ब्यूटी केवल चेहरे की सुंदरता तक सीमित नहीं होती। यह सादगी, आत्मविश्वास, ईमानदारी और अभिनय के माध्यम से सामने आती है। कोंकणा सेन शर्मा से लेकर तृप्ति डिमरी तक, ये अभिनेत्रियाँ साबित करती हैं कि बिना ज़्यादा तामझाम के भी खूबसूरत दिखा जा सकता है, और वही खूबसूरती सबसे ज्यादा टिकाऊ होती है।





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