Media4samachar की ओर से डॉ. सुभाष चंद्रा को जन्मदिन की ढेरों बधाई और शुभकामनाएं
भारतीय मीडिया इंडस्ट्री के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक और ‘जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड’ (ZEEL) के चेयरमैन एमेरिटस डॉ. सुभाष चंद्रा का आज जन्मदिन है। यह अवसर उनके उस असाधारण सफर को याद करने का है, जिसने भारतीय ब्रॉडकास्टिंग इंडस्ट्री की दिशा बदल दी।
डॉ. चंद्रा को अक्सर ‘भारतीय टेलीविजन का पिता’ कहा जाता है। उन्हें देश में पहले निजी सैटेलाइट टीवी चैनल लाने का श्रेय जाता है, जिसने भारत में मल्टी-बिलियन डॉलर की एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का आधार तैयार किया।
उनकी कहानी देश में आर्थिक उदारीकरण के दौर में आए बड़े बदलाव की मिसाल है। वर्ष 1992 में, जब निजी प्रसारण की कल्पना भी नहीं थी, उन्होंने ‘जी टीवी’ लॉन्च किया। उस समय ‘दूरदर्शन’ का एकछत्र राज था, ऐसे में यह कदम तकनीकी और राजनीतिक दोनों ही स्तर पर बेहद साहसी माना गया। यही कदम आगे चलकर भारतीय मीडिया उपभोग के तरीके में बड़ा बदलाव साबित हुआ। इसके बाद उन्होंने ‘जी न्यूज’ की शुरुआत की, जो देश का पहला निजी न्यूज चैनल बना। इसी से उन्हें दूरदर्शी रणनीतिकार के रूप में पहचान मिली।
उनकी पहल के बाद जो मीडिया उद्योग विकसित हुआ, उसने पूरे इकोसिस्टम का चेहरा बदल दिया। उद्योग से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, आज इस क्षेत्र में 50 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है—उस सेक्टर से, जिसकी शुरुआत उन्होंने की थी।
डॉ. चंद्रा का ब्रैंड ‘जी’ आज वैश्विक पहचान रखता है। यह नेटवर्क 190 देशों में पहुंच चुका है और प्रसारण, डिजिटल, फिल्म, संगीत और लाइव इवेंट सहित कई क्षेत्रों में अरबों दर्शकों तक कंटेंट पहुंचा रहा है, जो किसी भी भारतीय मीडिया कंपनी के लिए बड़ी उपलब्धि है।
मनोरंजन जगत के अलावा उनकी महत्वाकांक्षा ने अन्य क्षेत्रों को भी छुआ। ‘एस्सेल ग्रुप’ (Essel Group) के तहत उन्होंने पैकेजिंग, अवसंरचना, शिक्षा, तकनीक और मनोरंजन से जुड़े कई व्यवसाय खड़े किए। उनकी राजनैतिक भूमिका भी महत्वपूर्ण रही और वे हरियाणा से राज्यसभा सदस्य चुने गए।
भारतीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों ने भी उनके योगदान को सम्मान दिया है। वे इंटरनेशनल एमी डायरेक्टोरेट अवॉर्ड पाने वाले पहले भारतीय हैं—यह वैश्विक टेलीविजन जगत का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है।
डॉ. सुभाष चंद्रा ने अपने करियर में दूरदर्शिता, जोखिम उठाने की क्षमता और लंबे समय तक सोचने के नजरिए का अनोखा मेल दिखाया। भारतीय टीवी इंडस्ट्री का विस्तार, मीडिया उद्यमशीलता की नई संस्कृति और दर्शकों की पसंद—इन सभी पर उनके निर्णयों की छाप आज भी नजर आती है।
आज उनके जन्मदिन के अवसर पर, उनका यह सफर हमें याद दिलाता है कि एक साहसिक विचार भी इतिहास लिख सकता है—अगर उसके पीछे दृढ़ इच्छाशक्ति और विश्वास हो।





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