NCLT केस, ₹22,000 करोड़ के दावे और निजी संपत्ति को लेकर वीडियो मैसेज में दी सफाई, वित्त मंत्री से स्वतंत्र जांच की मांग
पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया और मीडिया में अपने बारे में फैल रही खबरों के बीच जी ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन डॉ. सुभाष चंद्रा ने वीडियो मैसेज जारी कर अपना पक्ष रखा है।
1. क्या कहा डॉ.चंद्रा ने ?
डॉ. चंद्रा ने कहा कि कुछ लोग उन्हें ऐसे लोगों से जोड़कर दिखा रहे हैं जिन्होंने देश के वित्तीय तंत्र को निचोड़ा है और पैसे से महल-जहाज खरीदे हैं। उन्होंने कहा, “जो प्यार आप सबने मुझे दिया है, उसी भरोसे पर कह रहा हूं, मेरे बारे में फैलाए जा रहे दावे मिथक हैं।”
उन्होंने याद दिलाया कि 24 जनवरी 2019 को एसेट-लायबिलिटी मिसमैच के कारण ग्रुप पर संकट आया था, तब उन्होंने खुद खुला पत्र लिखकर अपनी गलतियां मानी थीं।
2. देनदारी पर सफाई – ₹45,000 करोड़ में से ₹43,000 करोड़ चुका दिया
डॉ. चंद्रा के मुताबिक एस्सेल ग्रुप पर कभी करीब ₹45,000 करोड़ की कुल देनदारी थी, जिसमें से लगभग ₹43,000 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है।
₹22,000 करोड़ नहीं, असली क्लेम ₹3,992 करोड़ का
मीडिया में चल रहे ₹22,000 करोड़ के आंकड़े को खारिज करते हुए उन्होंने कहा:
– वास्तविक क्लेम ₹3,992 करोड़ का है
– इसमें से ₹620 करोड़ का सेटलमेंट पहले ही हो चुका है
– ₹1,063 करोड़ का अतिरिक्त ऑफर लेनदारों को दिया गया है
– बाकी वसूली के लिए राज्य सरकारों से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का पैसा आना बाकी है और 1-2 प्रॉपर्टी बेचने की तैयारी है
4. निजी संपत्ति वाले दावे पर जवाब
डॉ. चंद्रा ने कहा कि एस्सेल ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों के मार्केट कैप को उनकी पर्सनल नेटवर्थ बताकर पेश किया जा रहा है।
“2016 में राज्यसभा चुनाव के दौरान मेरी घोषित नेटवर्थ ₹39.08 करोड़ थी जो सार्वजनिक रिकॉर्ड में है, तो 2017 में मेरी निजी नेटवर्थ ₹45,888 करोड़ कैसे हो सकती है?”
5. वित्त मंत्री से क्या मांग की ?
पूरे मामले में दूध का दूध पानी का पानी करने के लिए उन्होंने वित्त मंत्री और बैंकिंग सिस्टम से एक स्वतंत्र ऑडिटर नियुक्त करने की मांग की है।




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