जयपुर:आमतौर पर मुनाफा कमाने वाले और राजस्थान के शीर्ष क्षेत्रीय न्यूज चैनलों में शुमार ‘फर्स्ट इंडिया न्यूज’ से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बढ़ते आर्थिक दबाव और वित्तीय संतुलन बनाने के प्रयास में प्रबंधन ने चैनल में कर्मचारियों की छंटनी (Layoffs) की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस लागत कटौती (Cost Curtailment) अभियान के पहले चरण में प्रबंधन ने 15 कर्मचारियों को एक महीने का अग्रिम वेतन देकर सेवामुक्त कर दिया है।
संपादकीय विभाग पर गिर सकती है गाज
प्रबंधन के इस अचानक उठाए गए कदम से मीडियाकर्मियों में हड़कंप मच गया है। सूत्रों का दावा है कि छंटनी का यह सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं है। आने वाले कुछ ही दिनों में एडिटोरियल (संपादकीय) विभाग से जुड़े कई और पत्रकारों और तकनीकी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
प्रबंधन ने जताई लाचारी
कर्मचारियों को निकाले जाने के फैसले पर चैनल के प्रवक्ता ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा कदम उठाना उनके लिए भी सुखद नहीं है। हालांकि, वर्तमान आर्थिक चुनौतियों और चैनल के बढ़ते परिचालन खर्च को देखते हुए प्रबंधन के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
उच्च एचआर खर्च और भारी-भरकम नेटवर्क बना वजह
फर्स्ट इंडिया उत्तर भारत का सबसे बड़ा क्षेत्रीय न्यूज चैनल माना जाता है, लेकिन यही विशाल ढांचा अब इसके लिए आर्थिक बोझ बनता दिख रहा है।
बजट का अंतर: जहाँ अन्य प्रमुख क्षेत्रीय चैनलों का औसत वार्षिक बजट 15 से 17 करोड़ रुपये होता है, वहीं फर्स्ट इंडिया का सालाना खर्च 28 करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है।
HR पर भारी खर्च: कुल बजट में से लगभग 10 करोड़ रुपये सिर्फ मानव संसाधन (HR) यानी कर्मचारियों के वेतन और सुविधाओं पर खर्च हो रहे हैं, जो इंडस्ट्री के मानकों से काफी अधिक है।
रिपोर्टर्स की फौज: आमतौर पर किसी क्षेत्रीय चैनल में 8 से 10 रिपोर्टर्स की टीम होती है, जबकि फर्स्ट इंडिया में 21 से 22 रिपोर्टर्स की बड़ी टीम कार्यरत है।
300 लोगों का स्टाफ: पूरे राजस्थान में रिपोर्टर्स, स्ट्रिंगर्स और इन्फॉर्मर्स को मिलाकर एडिटोरियल टीम में लगभग 300 लोग जुड़े हुए हैं।
कंपनी अब अपने परिचालन ढांचे को री-स्ट्रक्चर (Restructure) करने और वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठा रही है, जिससे आने वाले दिनों में मीडिया जगत में और हलचल देखने को मिल सकती है।





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