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‘3 साल की प्रैक्टिस जरूरी’, वकीलों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पलटा 23 साल का नियम: एड.नूपुर धमीजा-संपादक

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एड.नूपुर धमीजा (सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया) संपादक-Media4samachar

Judicial Service Minimum Practice SC News in Hindi: लॉ की पढ़ाई करने वालों को अगर न्यायिक सेवा में जाना है तो उन्हें 3 साल की वकालत प्रैक्टिस करनी होगी। एलएलबी, एलएलएम जैसे लॉ ग्रेजुएट्स के लिए सुप्रीम कोर्ट का नया फैसला आया है।

Judicial Service Rules Change: वकालत की पढ़ाई करने वालों के लिए सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला आया है। मंगलवार, 20 मई को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने ज्यूडिशियल सर्विस में एंट्री लेवल पोस्ट पर नौकरी के लिए भी पात्रता का नियम बदल दिया है। 3 साल की न्यूनतम एडवोकेट प्रैक्टिस का अनिवार्य नियम वापस लाया गया है। SC में हियरिंग के बाद चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया CJI बीआर गवई, जस्टिस एजी मसीह और जस्टिस के विनोद की बेंच ने ये फैसला सुनाया है।

Judicial Service Eligibility: सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘पिछले 20 वर्षों से फ्रेश लॉ ग्रेजुएट्स को ज्यूडिशियल ऑफिसर्स के तौर पर अप्वाइंट किया जा रहा है, जिन्हें एक दिन भी बार प्रैक्टिस का अनुभव नहीं है। ये प्रक्रिया सफल नहीं रही है। ऐसे नए लॉ ग्रेजुएट्स ने कई परेशानियां खड़ी की हैं।’

कोर्ट ने कहा, ‘कार्यभार संभालने के पहले दिन से ही जजों को याचिकाकर्ताओं के जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति और प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों से निपटना पड़ता है। न तो कानून की किताबों में दिया गया ज्ञान, न ही प्री सर्विस ट्रेनिंग एक वास्तविक कोर्ट सिस्टम में काम करने के प्रत्यक्ष अनुभव की जगह ले सकती हैं। ये तभी संभव है जब कैंडिडेट ने वास्तव में कोर्ट का काम देखा हो। समझा हो कि वकील और जज कोर्ट में कैसे काम करते हैं।’
कोर्ट ने कहा, ‘कार्यभार संभालने के पहले दिन से ही जजों को याचिकाकर्ताओं के जीवन, स्वतंत्रता, संपत्ति और प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों से निपटना पड़ता है। न तो कानून की किताबों में दिया गया ज्ञान, न ही प्री सर्विस ट्रेनिंग एक वास्तविक कोर्ट सिस्टम में काम करने के प्रत्यक्ष अनुभव की जगह ले सकती हैं। ये तभी संभव है जब कैंडिडेट ने वास्तव में कोर्ट का काम देखा हो। समझा हो कि वकील और जज कोर्ट में कैसे काम करते हैं।’

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Author: media4samachar

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