लखनऊ छात्रों के जारी विरोध-प्रदर्शन की ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान Zee News के पत्रकार प्रिंस पर हुए हिंसक हमले से पत्रकारिता जगत और प्रबुद्ध वर्ग में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ज़मीन पर उतरकर हर विषम परिस्थिति में सच्चाई जनता तक पहुँचाने वाले एक सजग पत्रकार के साथ मारपीट की यह घटना बेहद चिंताजनक और निंदनीय है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, Zee News के पत्रकार प्रिंस छात्रों के प्रदर्शन के दौरान ग्राउंड ज़ीरो से लगातार रिपोर्टिंग कर रहे थे। इसी दौरान कुछ असमाजिक व उपद्रवी तत्वों ने कवरेज में व्यवधान डालते हुए उन पर हमला कर दिया और उनके साथ मारपीट की। घटना के बाद से ही मीडिया कर्मियों और विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों में भारी रोष है।
“एसी स्टूडियो नहीं, ज़मीन पर काम करने वाले पत्रकार हैं प्रिंस”
प्रिंस को करीब से जानने वाले वरिष्ठ साथियों और मीडिया जगत के लोगों का कहना है कि प्रिंस उन पत्रकारों में शामिल हैं जो एयर-कंडीशन (AC) स्टूडियो में बैठकर खबरें बनाने के बजाय ज़मीनी हकीकत सामने लाते हैं। मौसम चाहे जैसा भी हो और परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, वे दिन-रात मेहनत कर निष्पक्ष खबरें जनता तक पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं।
लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं
किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में खबर या विचार से असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन असहमति का जवाब हिंसा, डराने-धमकाने या मारपीट से देना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ (प्रेस) के कैमरे और कलम को दबाने की कोशिशें सीधे तौर पर लोकतंत्र की आत्मा पर प्रहार हैं।
निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग
घटना के बाद से ही पत्रकार संगठनों और प्रमुख हस्तियों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है।
- तत्काल कार्रवाई: घटना में शामिल दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की जाए।
- सुरक्षा की गारंटी: ग्राउंड रिपोर्टिंग कर रहे फील्ड जर्नलिस्ट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रशासनिक कदम उठाए जाएं।
पत्रकारिता की स्वतंत्रता और निष्पक्षता तभी बनी रह सकती है जब पत्रकार निर्भीक होकर काम कर सकें। यदि लोकतंत्र का चौथा स्तंभ ही सुरक्षित नहीं रहेगा, तो जनता तक सच का पहुँचना नामुमकिन हो जाएगा।





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