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सांसद पप्पू यादव ने ‘लाइव टाइम्स’ चैनल के न्यूज डायरेक्टर दीपक चौरसिया को भेजा 10 करोड़ का लीगल नोटिस

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शो छोड़कर भागे सांसद ने लगाया मानहानि का आरोप; दीपक चौरसिया का पलटवार— “चुनाव आयोग के हलफनामे से ही पूछे थे सवाल, पीछे हटने वालों में से नहीं”

​बिहार के पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव और वरिष्ठ पत्रकार व ‘लाइव टाइम्स’ (Live Times) न्यूज चैनल के न्यूज डायरेक्टर दीपक चौरसिया के बीच शुरू हुआ विवाद अब कानूनी लड़ाई में तब्दील हो गया है। एक टीवी इंटरव्यू के दौरान उठे तीखे सवालों के बाद सांसद पप्पू यादव ने दीपक चौरसिया को 10 करोड़ रुपये का मानहानि (Defamation) का लीगल नोटिस भेजा है।

​इस नोटिस के जवाब में दीपक चौरसिया ने एक वीडियो जारी कर तीखा पलटवार किया है और साफ कहा है कि वे इस तरह के कानूनी दबावों से डरने या पीछे हटने वाले नहीं हैं।

पूरे विवाद के मुख्य बिंदु

  • लाइव शो में बढ़ा तनाव: ‘लाइव टाइम्स’ के लाइव इंटरव्यू के दौरान जब न्यूज डायरेक्टर दीपक चौरसिया ने 2024 के चुनावी आंकड़ों को लेकर सवाल पूछे, तो बहस बढ़ गई और पप्पू यादव बीच में ही शो छोड़कर चले गए।
  • 10 करोड़ का लीगल नोटिस: साक्षात्कार के बाद सांसद पप्पू यादव की ओर से दीपक चौरसिया को 10 करोड़ रुपये का कानूनी नोटिस थमाया गया।
  • चुनावी हलफनामे पर बहस: दीपक चौरसिया का दावा है कि उन्होंने कोई मनगढ़ंत आरोप नहीं लगाए, बल्कि चुनाव आयोग को दिए गए 2024 के आधिकारिक हलफनामे (Affidavit) के आधार पर ही लंबा विश्लेषण किया था।
  • संपादकीय पक्ष: चैनल के एडिटर-इन-चीफ दिलीप कुमार सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि इस नोटिस का जवाब कानूनी तौर पर मजबूती से दिया जाएगा।

“किसका मान और किसकी हानि?” — दीपक चौरसिया का तीखा प्रहार

​लीगल नोटिस मिलने के बाद ‘लाइव टाइम्स’ के न्यूज डायरेक्टर दीपक चौरसिया ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी बात रखी। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा:

“किसका मान और किसकी हानि? एक पत्रकार का काम सवाल पूछना है। मैंने जो भी सवाल पूछे थे, वे पप्पू यादव द्वारा 2024 के चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के आधार पर ही थे। जब सवाल पूछे गए, तो वे लाइव शो से चले गए। अब 10 करोड़ का लीगल नोटिस भेजा है, लेकिन हम पीछे हटने वालों में से नहीं हैं।”

दीपक चौरसिया, न्यूज डायरेक्टर (‘लाइव टाइम्स’)

 

‘लाइव टाइम्स’ प्रबंधन का रुख: “कानूनी तौर पर दिया जाएगा जवाब”

​इस घटनाक्रम पर नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ दिलीप कुमार सिंह ने भी रुख साफ किया है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष पत्रकारिता करते समय इस तरह की कानूनी चुनौतियाँ आती रहती हैं। चैनल की लीगल टीम नोटिस का अध्ययन कर रही है और इसका करारा व तथ्यात्मक कानूनी जवाब दिया जाएगा।

विवाद का विस्तृत विश्लेषण

​चुनावी हलफनामे (Affidavit) में दर्ज संपत्ति, आपराधिक मामलों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े बयानों को लेकर शुरू हुई यह जंग अब कानूनी दांव-पेच तक पहुँच चुकी है।

​जहाँ एक तरफ सांसद पप्पू यादव का मानना है कि लाइव शो में पूछे गए सवालों और विश्लेषण से उनकी सामाजिक व राजनीतिक छवि को नुकसान पहुँचा है, वहीं दूसरी तरफ ‘लाइव टाइम्स’ और दीपक चौरसिया इसे ‘जनता के प्रति जनप्रतिनिधि की जवाबदेही’ और ‘पत्रकारिता की स्वतंत्रता’ से जोड़कर देख रहे हैं। अब देखना यह होगा कि यह कानूनी लड़ाई अदालत में क्या मोड़ लेती है।

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Author: media4samachar

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