लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में खुफिया एजेंसी (IB) और स्थानीय पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय सेक्स रैकेट का पर्दाफाश करते हुए इसकी मुख्य सरगना, उज्बेकिस्तान निवासी 45 वर्षीय लोला कायूमोवा को हिरासत में लिया है। आरोपी महिला नेपाल और उज्बेकिस्तान से अवैध रूप से विदेशी युवतियों की तस्करी कर भारत लाती थी। इतना ही नहीं, युवतियों को ‘रशियन लुक’ देने और उन्हें कम उम्र का दिखाने के लिए डॉक्टर की मदद से उनकी प्लास्टिक सर्जरी भी कराई जाती थी।
लोला को सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है, जहां उससे गहन पूछताछ जारी है।
थाईलैंड में रची गई थी नेटवर्क की नींव
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, लोला सितंबर 2013 में पहली बार भारत आई थी। उसकी मुलाकात थाईलैंड में डॉक्टर विवेक गुप्ता से हुई थी, जो लखनऊ के पत्रकारपुरम और अहिमामऊ में ‘मिनर्वा क्लिनिक’ चलाता है। डॉ. विवेक ही लोला को भारत लेकर आया था। शुरुआत में दिल्ली-NCR में पैर पसारने के बाद लोला 2014 में लखनऊ शिफ्ट हो गई।
लखनऊ में उसकी पहचान केरल निवासी एक कथित पत्रकार (त्रिजिन) से हुई, जिसके साथ वह लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी और स्पा सेंटरों की आड़ में धीरे-धीरे अपना खुद का नेटवर्क खड़ा कर लिया।
प्लास्टिक सर्जरी का खेल: जवान दिखाने के लिए किए गए ऑपरेशन
इस पूरे गिरोह की सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि डॉक्टर विवेक गुप्ता रैकेट का सक्रिय सदस्य बनकर युवतियों की प्लास्टिक सर्जरी करता था।
- चेहरे का हुलिया बदलना: अवैध रूप से लाई गई विदेशी महिलाओं की पहचान छुपाने और उन्हें अधिक आकर्षक बनाने के लिए उनकी प्लास्टिक सर्जरी की जाती थी।
- खुद की 7 बार सर्जरी: रैकेट की सरगना लोला (उम्र 45 वर्ष) खुद को 29 साल का दिखाने के लिए चेहरे, होंठ और शरीर के अन्य हिस्सों की 7 बार प्लास्टिक सर्जरी करवा चुकी थी।
नेपाल सीमा से तस्करी और फर्जी दस्तावेज
लोला उज्बेकिस्तान की महिलाओं को भारत में ज्यादा पैसे कमाने का लालच देकर नेपाल के रास्ते अवैध रूप से भारत लाती थी। भारत में बिना वैध वीजा और पासपोर्ट के रह रही इन महिलाओं को पॉश इलाकों (जैसे ओमेक्स हजरतगंज अपार्टमेंट) के फ्लैट्स और होटलों में ठहराया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि लोला ने भारत में अवैध रूप से बने आधार कार्ड, पैन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस भी हासिल कर रखे थे। उसने सेक्स रैकेट की काली कमाई से लखनऊ के ओमेक्स आर-1 में एक महंगा फ्लैट (नंबर 1103) भी खरीद लिया था।
जून 2025 की छापेमारी के बाद से चल रही थी फरार
20 जून 2025 को सुशांत गोल्फ सिटी क्षेत्र के न्यू हजरतगंज स्थित एक अपार्टमेंट में पुलिस ने छापेमारी की थी, जहां से उज्बेकिस्तान की दो युवतियों—होलिडा और नीलोफर—को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में दोनों ने लोला और डॉ. विवेक गुप्ता के गठजोड़ का खुलासा किया था।
तब से ही लोला अंडरग्राउंड चल रही थी। करीब एक साल से वांछित इस आरोपी को अब खुफिया एजेंसी (IB) ने ट्रैक करके दबोच लिया।
पुलिस का बयान:
“FRO और खुफिया इनपुट के आधार पर ताशकंद (उज्बेकिस्तान) निवासी लोला क्यूमोवा को हिरासत में लिया गया है। उसके पास से कई फर्जी भारतीय दस्तावेज और मोबाइल से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। इस नेटवर्क में शामिल अन्य एजेंटों, सहयोगियों और संपर्कों की जांच की जा रही है।”
— मोहम्मद मुस्ताक, DCP साउथ, लखनऊ
नेटवर्क का दायरा
पुलिस की जांच में सामने आया है कि लोला का यह रैकेट केवल लखनऊ तक सीमित नहीं था, बल्कि दिल्ली-NCR समेत देश के कई अन्य राज्यों में भी फैला हुआ था। लोला युवतियों को अलग-अलग शहरों के स्पा सेंटरों, होटलों और प्राइवेट फ्लैट्स में भेजकर मोटा कमीशन वसूलती थी।
फ़िलहाल पुलिस लोला के मोबाइल डाटा को खंगाल रही है, जिससे इस नेटवर्क से जुड़े कई बड़े नामों के बेनकाब होने की संभावना है।





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