लखनऊ: देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान ‘दैनिक भास्कर’ (Dainik Bhaskar) के लखनऊ ब्यूरो से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। संस्थान के सीनियर वीडियो एडिटर प्रमोद कुमार प्रजापति ने कार्यस्थल पर हो रहे मानसिक उत्पीड़न और मैनेजर के तानाशाही रवैये से तंग आकर इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने मैनेजर ब्रजेश मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए मीडिया जगत की अंदरूनी कार्यसंस्कृति पर सवाल खड़े किए हैं।
साढ़े तीन साल का सफर और कड़वा अंत
प्रमोद कुमार प्रजापति पिछले लगभग साढ़े तीन वर्षों से दैनिक भास्कर, लखनऊ में अपनी सेवाएँ दे रहे थे। उनका आरोप है कि नए मैनेजर ब्रजेश मिश्रा के आने के बाद से ही उनके लिए स्थितियाँ असहनीय बना दी गईं। प्रमोद के अनुसार, उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया ताकि वह स्वयं नौकरी छोड़ दें और मैनेजर अपनी पसंद के किसी व्यक्ति को उस पद पर रख सकें।
मैनेजर पर लगे गंभीर आरोप
प्रतिष्ठित मीडिया वेबसाइटों भड़ास मीडिया और Media4samachar को भेजे गए अपने पत्र में प्रमोद ने मैनेजर ब्रजेश मिश्रा की कार्यशैली पर निम्नलिखित बिंदु उठाए हैं:
अपमानजनक व्यवहार: बात-बात पर अपशब्दों का प्रयोग करना और सार्वजनिक रूप से बेइज्जत करना।
नौकरी की धमकी: बार-बार नौकरी से निकालने का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाना।
पक्षपात (Favoritism): पुराने और अनुभवी कर्मचारियों को हटाकर अपने चहेतों को फिट करने की कोशिश करना।
”यह सिर्फ मेरे साथ नहीं हुआ, बल्कि कई अन्य कर्मचारी भी इसी तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं। एचआर विभाग को शिकायतें भी की गईं, लेकिन उच्च स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।” — प्रमोद कुमार प्रजापति (इस्तीफा पत्र का अंश)
HR विभाग की चुप्पी पर सवाल
इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि पीड़ित कर्मचारी के अनुसार, इस पूरे विवाद की जानकारी संस्थान के मानव संसाधन (HR) विभाग को ईमेल के जरिए दी गई थी। बावजूद इसके, प्रबंधन ने न तो मैनेजर के व्यवहार की जांच की और न ही कर्मचारियों को सुरक्षा देने का प्रयास किया। अंततः, २ फरवरी को अपना नोटिस पीरियड पूरा कर प्रमोद ने संस्थान को अलविदा कह दिया।
मीडिया जगत में ‘टॉक्सिक’ वर्क कल्चर
यह घटना एक बार फिर मीडिया संस्थानों के भीतर व्याप्त ‘टॉक्सिक’ वर्क कल्चर को उजागर करती है। जहाँ एक तरफ पत्रकार दूसरों के हक की आवाज उठाते हैं, वहीं संस्थान के भीतर वे खुद शोषण और मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं।
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दैनिक भास्कर के मैनेजर ब्रजेश मिश्रा से तंग इस वीडियो एडिटर ने नौकरी ही छोड़ दी! पढ़ें चिट्ठी
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देश के बड़े मीडिया संस्थानों में से एक दैनिक भास्कर से जुड़े एक पत्रकार ने अपने कार्यस्थल के अनुभवों को साझा करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं। भड़ास को भेजे गए अपने पत्र में उन्होंने मानसिक उत्पीड़न, अपमानजनक व्यवहार और संस्थान के भीतर की खराब कार्यसंस्कृति को लेकर अपनी पीड़ा जाहिर की है…नीचे पढ़ें
आदरणीय सर,
मैं प्रमोद कुमार प्रजापति, लखनऊ में दैनिक भास्कर में सीनियर वीडियो एडिटर के पद पर कार्यरत था। कार्य के दौरान मुझे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। मेरे मैनेजर द्वारा मुझ पर दबाव बनाया जाता रहा ताकि मैं नौकरी छोड़ दूं और उनकी पसंद के व्यक्ति को मेरी जगह रखा जा सके।
मैंने लखनऊ भास्कर में करीब साढ़े तीन साल तक काम किया। लेकिन नए मैनेजर ब्रजेश मिश्रा के आने के बाद स्थिति लगातार खराब होती चली गई। उन्होंने जानबूझकर मुझे परेशान करना शुरू किया—बात-बात पर अपमानित करना, अपशब्दों का प्रयोग करना और बार-बार नौकरी से निकालने की धमकी देना आम बात हो गई थी।
यह सिर्फ मेरे साथ ही नहीं हुआ, बल्कि कई अन्य कर्मचारियों ने भी इसी तरह की परेशानियों का सामना किया। कई लोगों ने इस संबंध में एचआर विभाग को ईमेल और शिकायतें भी कीं, लेकिन उच्च स्तर पर इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई और न ही यह जानने की कोशिश की गई कि कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों हो रहा है।
इन्हीं परिस्थितियों के चलते मैंने 2 फरवरी को विधिवत नोटिस पीरियड पूरा करते हुए संस्थान से इस्तीफा दे दिया।
मेरा आपसे निवेदन है कि मेरी इस बात को अपने प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित करें, ताकि लोगों को यह पता चल सके कि मीडिया जगत में भी इस तरह की कार्य संस्कृति और मानसिकता मौजूद है।
यह पूरा नोट मैंने अपनी स्थिति और अनुभव साझा करने के लिए लिखा है। आवश्यकतानुसार मैं अपना इस्तीफा संबंधी स्क्रीनशॉट भी उपलब्ध करा रहा हूं।






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