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गैस एजेंसी पर कवरेज करने गई महिला पत्रकार को ‘फर्जी पत्रकार’ ने रोका,महिला रिपोर्टर ने सरेआम सिखाया सबक, देखें वीडियो

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लखनऊ/डिजिटल डेस्क: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस समय 39 सेकंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने पत्रकारिता के गिरते स्तर और फील्ड रिपोर्टिंग के दौरान आने वाली बाधाओं पर एक नई बहस छेड़ दी है। मामला एक गैस एजेंसी का है, जहाँ जनता की समस्याओं को दिखाने पहुँची 4PM की महिला पत्रकार को एक अज्ञात युवक ने कवरेज करने से रोकने की कोशिश की।

​क्या है पूरा मामला?

​वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि महिला पत्रकार गैस की किल्लत और सिलेंडर के लिए लगी लंबी लाइनों को कवर कर रही हैं। इसी बीच एक युवक सामने आता है और पत्रकार को वीडियो बनाने से रोकता है। युवक का दावा है कि वह भी ‘इलेक्ट्रॉनिक मीडिया’ से जुड़ा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि वह पत्रकार की मदद करने या खुद रिपोर्टिंग करने के बजाय, उन्हें काम करने से मना कर रहा है।

महिला पत्रकार का ‘करारा जवाब

जब उस युवक ने पत्रकार को ज्ञान देने की कोशिश की, तो महिला रिपोर्टर ने उसे मौके पर ही जबरदस्त ‘ज्ञान पिलाया’। उन्होंने निडरता से सवाल किया कि अगर वह पत्रकार है, तो वह जनता की समस्या दिखाने से क्यों रोक रहा है? वीडियो में पत्रकार का आत्मविश्वास और तर्कों के साथ दिया गया जवाब अब सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है।

4PM का तीखा हमला: “गैस एजेंसी अब ‘पत्रकार’ भी हायर करने लगी है”

​इस घटना के बाद 4PM ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर कड़े सवाल दागे हैं। ट्वीट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
​एजेंसी पर तंज: क्या गैस एजेंसियां अब सिलेंडर के साथ-साथ ‘नकली पत्रकार’ भी पालने लगी हैं?
​गोदी मीडिया पर निशाना: जब जनता सिलेंडर के लिए लाइनों में खड़ी मर रही है, तब ये ‘तथाकथित’ पत्रकार सच्चाई छुपाने के लिए कहाँ से प्रकट हो जाते हैं?
​पहचान का सवाल: वह शख्स कौन है? किस चैनल से है? और किसके इशारे पर एक महिला पत्रकार का रास्ता रोकने आया था?

Media4samachar का विश्लेषण: पत्रकारिता या ‘दलाली’?

​यह घटना दर्शाती है कि ग्राउंड जीरो पर सच दिखाना कितना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। सवाल यह है कि:
​क्या कोई पत्रकार दूसरे पत्रकार को सार्वजनिक स्थान पर वीडियो बनाने से रोक सकता है?
​बिना आईडी कार्ड और संस्थान का नाम बताए खुद को मीडियाकर्मी कहना क्या ‘ब्लैकमेलिंग’ की श्रेणी में नहीं आता?
​क्या एजेंसियां अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए अब ऐसे लोगों का सहारा ले रही हैं?
​संपादकीय टिप्पणी: पत्रकारिता का धर्म जनता की आवाज उठाना है, न कि सत्ता या संस्थानों की खामियों पर पर्दा डालना। 4PM की महिला पत्रकार ने जिस साहस का परिचय दिया, वह काबिले तारीफ है।

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Author: media4samachar

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