भोपाल/जबलपुर। कटनी जिले के पूर्व पुलिस कप्तान और 2014 बैच के आईपीएस (IPS) अधिकारी अभिजीत कुमार रंजन के विरुद्ध विभागीय जांच (Departmental Inquiry) की अनुशंसा के बाद अब मामला मुख्यमंत्री कार्यालय में लंबित होने की जानकारी सामने आई है।
क्या है पूरा मामला ?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कटनी की तत्कालीन सीएसपी ख्याति मिश्रा के तहसीलदार पति शैलेंद्र बिहारी शर्मा ने आरोप लगाया कि एसपी के निर्देश पर पुलिसकर्मियों ने उनके घर पर धावा बोलकर परिवार के सदस्यों, महिलाओं और उनके आठ वर्षीय बेटे के साथ मारपीट की। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 1 जून 2025 को सोशल मीडिया के माध्यम से एसपी अभिजीत रंजन को हटाने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद उन्हें भोपाल पुलिस मुख्यालय (PHQ) में एआईजी के पद पर अटैच कर दिया गया था।
गंभीर आरोपों की फेहरिस्त
जबलपुर हाई कोर्ट के अधिवक्ता देवेन्द्र शर्मा द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए पत्र में अधिकारी पर कई संगीन आरोप लगाए गए हैं:
जांच रुकवाने का आरोप:
शिकायतकर्ता का दावा है कि पुलिस मुख्यालय और एसीएस होम (ACS Home) द्वारा तीन माह पहले ही विभागीय जांच की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय भेजी जा चुकी है, लेकिन अधिकारी ने अपने पद, धनबल और बाहुबल का प्रयोग कर इसे लंबित रखवाया है।
धमकी और षड्यंत्र: पत्र में आरोप लगाया गया है कि अधिकारी लगातार आवेदक और उसके परिवार की हत्या कराने का आपराधिक षड्यंत्र रच रहे हैं।
सेवा नियमों का उल्लंघन: अधिकारी पर अखिल भारतीय सिविल सेवा आचरण नियमों के विपरीत कार्य करने, निर्धारित संख्या (दो) से अधिक बच्चे होने और आईपीएस पद के लिए आवश्यक न्यूनतम लंबाई (165 सेमी) के मानकों को पूरा न करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
अकूत संपत्ति की जांच: अधिवक्ता ने मांग की है कि अधिकारी की मात्र 10-11 वर्षों की सेवा में अर्जित की गई कथित ‘अकूत संपत्ति’ की जांच सीबीआइ (CBI) से करवाई जाए।
प्रशासनिक स्थिति
दस्तावेजों के अनुसार, जबलपुर डीआईजी (DIG) द्वारा की गई जांच में दो आरोप पहले ही सिद्ध हो चुके हैं और इसकी रिपोर्ट पीएचक्यू भेजी जा चुकी है। पुलिस मुख्यालय ने 6 पेज की तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर गृह विभाग को भेजी है। यदि विभागीय जांच में अधिकारी दोषी पाए जाते हैं, तो उन पर वेतन वृद्धि रोकने से लेकर सेवा से बर्खास्तगी तक की कार्रवाई हो सकती है।





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