फतेहगढ़ नगर के पूर्व एजेंट रवि नंदन मिश्रा ने ‘अमृत विचार’ अखबार के प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एजेंसी बंद होने और सभी नियम-शर्तें पूरी करने के बावजूद प्रबंधन उनकी ₹15,000 की सिक्योरिटी राशि वापस नहीं कर रहा है। एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भुगतान न होने से पीड़ित को मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
औपचारिकताएं पूरी, फिर भी भुगतान अटका
रवि नंदन मिश्रा के अनुसार, उन्होंने एजेंसी बंद होने के बाद कंपनी के निर्देशानुसार मूल शपथ-पत्र सहित सभी आवश्यक दस्तावेज स्पीड पोस्ट के जरिए भेज दिए थे।
”दस्तावेजों की डिलीवरी हुए एक महीने से ज्यादा का समय हो चुका है। इसके बावजूद न तो राशि खाते में आई और न ही कंपनी की ओर से कोई साफ जवाब मिला।”
— रवि नंदन मिश्रा, पीड़ित पूर्व एजेंट
50 से अधिक बार किए फोन, नहीं मिला जवाब
पीड़ित का आरोप है कि उन्होंने भुगतान की जानकारी के लिए प्रबंधन को 50 से अधिक बार फोन किया, लेकिन अधिकांश कॉल्स का कोई उत्तर नहीं मिला। जब भी बात हुई, उन्हें सिर्फ इंतजार करने का आश्वासन देकर टाल दिया गया। रवि नंदन का कहना है कि जब सारी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं, तो भुगतान रोकने का कोई औचित्य नहीं है।
मांग: जल्द हो भुगतान या स्थिति की जाए स्पष्ट
रवि नंदन मिश्रा ने मांग की है कि प्रबंधन मामले का तत्काल संज्ञान ले और उनकी जमानत राशि उनके बैंक खाते में ट्रांसफर करे। उन्होंने कहा कि यदि कोई औपचारिकता शेष है, तो उसकी लिखित या स्पष्ट जानकारी दी जाए, अन्यथा अनावश्यक देरी बंद कर तुरंत भुगतान किया जाए।
यह मामला अब केवल एक एजेंट के पैसे का नहीं, बल्कि संस्थान की साख और एजेंटों के बीच भरोसे का भी है। अब देखना यह है कि अमृत विचार प्रबंधन इस पर क्या रुख अपनाता है और पीड़ित को कब तक न्याय मिलता है।




Users Today : 9
Users Yesterday : 275