लखनऊ | 1 अप्रैल, 2026
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में श्रम विभाग ने मीडिया जगत से जुड़ी एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। लखनऊ क्षेत्र के डिप्टी लेबर कमिश्नर (DLC) ने ‘राष्ट्रीय सहारा’ प्रबंधन को कड़ा निर्देश देते हुए 27 मीडियाकर्मियों का पिछले चार महीनों का बकाया वेतन तत्काल प्रभाव से चुकाने का आदेश जारी किया है।
36 लाख रुपये से अधिक का होगा भुगतान
प्रशासनिक आदेश के मुताबिक, सहारा प्रबंधन को कुल 36,57,336 रुपये की राशि एक महीने के भीतर संबंधित कर्मचारियों के खातों में जमा करनी होगी। यह आदेश उत्तर प्रदेश औद्योगिक शांति (मजदूरी का समय पर भुगतान) अधिनियम, 1978 की धाराओं के तहत पारित किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कलानिधि मिश्रा समेत 26 अन्य कर्मचारियों ने यूपी न्यूज पेपर इम्प्लाइज यूनियन के माध्यम से श्रमायुक्त कार्यालय में वाद दायर किया।
- अवधि: कर्मचारी सितंबर 2025 से दिसंबर 2025 तक कार्यरत थे।
- शिकायत: उक्त चार महीनों का वेतन प्रबंधन द्वारा बिना किसी ठोस कारण के रोक लिया गया था।
- दावा: बार-बार अनुरोध के बाद भी वेतन न मिलने पर कर्मियों ने कानूनी रास्ता अपनाया।
प्रबंधन की दलीलों को किया गया दरकिनार
सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय सहारा प्रबंधन ने अपना पक्ष रखते हुए दो मुख्य तर्क दिए थे:
- नए श्रम कानून लागू होने के कारण पुराने अधिनियम के तहत यह मामला विचारणीय नहीं है।
- शिकायत करने वाले कर्मचारी ‘वर्कमैन’ (श्रमिक) की श्रेणी में नहीं आते।
हालांकि, डिप्टी लेबर कमिश्नर ने इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया। DLC ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों से यह साबित होता है कि निर्धारित अवधि में काम लिया गया लेकिन वेतन का भुगतान नहीं हुआ, जो कि मानवाधिकारों और श्रमिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है।
प्रशासन की चेतावनी
DLC ने अपने आदेश में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि यदि एक महीने के भीतर 36.57 लाख रुपये की राशि का भुगतान नहीं किया जाता है, तो प्रबंधन के खिलाफ आगे की कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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