देश के प्रतिष्ठित हिंदी समाचार पत्र ‘दैनिक जागरण’ से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। संस्थान ने अपनी संगठनात्मक क्षमता को मजबूत करने के लिए उत्तर प्रदेश को संपादकीय दृष्टि से दो महत्वपूर्ण हिस्सों— यूपी ईस्ट और यूपी वेस्ट में विभाजित कर दिया है। इस नए ढांचे के तहत प्रबंधन ने दो वरिष्ठ पत्रकारों को ‘उप राज्य संपादक’ की नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
दो क्षेत्रों में बंटा उत्तर प्रदेश
संस्थान की नई रणनीति के अनुसार, उत्तर प्रदेश के व्यापक भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए प्रबंधन ने इसे दो कमानों में बांटा है। सूचना के मुताबिक:
- जितेंद्र शुक्ला: इन्हें यूपी ईस्ट का उप राज्य संपादक नियुक्त किया गया है।
- मनीष तिवारी: इन्हें यूपी वेस्ट के उप राज्य संपादक की कमान सौंपी गई है।
ये दोनों ही वरिष्ठ अधिकारी उत्तर प्रदेश के राज्य संपादक आशुतोष शुक्ला के मार्गदर्शन में कार्य करेंगे।
मनीष तिवारी: पत्रकारिता का लंबा अनुभव
वरिष्ठ पत्रकार मनीष तिवारी अब तक लखनऊ संस्करण में स्थानीय संपादक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। वर्ष 2008 में दैनिक जागरण से अपने करियर की शुरुआत करने वाले तिवारी ने नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों पर कार्य किया है।
उन्हें उत्तर प्रदेश के जिला प्रशासन, उच्च शिक्षा और राजनीतिक घटनाक्रमों का गहरा जानकार माना जाता है। मनीष तिवारी ने 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों के साथ-साथ भट्टा पारसौल आंदोलन और कई लोकसभा चुनावों की व्यापक कवरेज की है।
जितेंद्र शुक्ला: अनुभवी नेतृत्व
फतेहपुर के मूल निवासी जितेंद्र शुक्ला ने दैनिक जागरण के साथ एक लंबा सफर तय किया है। उन्होंने बिहार, झारखंड और बरेली जैसी महत्वपूर्ण इकाइयों में सफल नेतृत्व प्रदान किया है। हाल ही में वे कानपुर यूनिट की जिम्मेदारी संभाल रहे थे, लेकिन अब उनकी विशेषज्ञता और अनुभव को देखते हुए उन्हें पूरे यूपी ईस्ट की कमान सौंपी गई है।
लखनऊ और कानपुर में नए चेहरों को कमान
संपादकीय फेरबदल के इस दौर में कई प्रमुख केंद्रों पर नए प्रभारियों की नियुक्ति भी हुई है:
- अंबिका बाजपेयी (लखनऊ): लखनऊ में अब तक इनपुट हेड की जिम्मेदारी संभाल रहे अंबिका बाजपेयी को अब लखनऊ का नया संपादकीय प्रभारी बनाया गया है।
- राकेश पाण्डेय (कानपुर): कानपुर यूनिट की कमान अब राकेश पाण्डेय के हाथों में होगी। इससे पहले वह प्रयागराज संस्करण में स्थानीय संपादक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।
निष्कर्ष:
दैनिक जागरण द्वारा किए गए इन बदलावों को उत्तर प्रदेश में अपनी पकड़ और अधिक मजबूत करने और संपादकीय कामकाज को अधिक विकेंद्रीकृत व प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




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