नई दिल्ली: देश के सबसे प्रतिष्ठित और पुराने उद्योग संगठन ‘फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री’ (FICCI) ने अपने शीर्ष नेतृत्व को मजबूती देते हुए वरिष्ठ पेशेवर अनंत स्वरूप को नया सेक्रेटरी जनरल नियुक्त किया है। उनकी यह नियुक्ति 14 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो गई है।
यह रणनीतिक बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब भारत वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में अपनी जगह मजबूत कर रहा है और घरेलू उद्योग जगत डिजिटल व हरित बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
नेतृत्व का नया समीकरण: स्वरूप और विज की जोड़ी
संगठन ने स्पष्ट किया है कि ज्योति विज पहले की तरह ही डायरेक्टर जनरल के पद पर कार्य करती रहेंगी। माना जा रहा है कि अनंत स्वरूप के प्रशासनिक अनुभव और ज्योति विज की संगठनात्मक पकड़ का तालमेल फिक्की को सरकार और निजी क्षेत्र के बीच एक प्रभावी सेतु के रूप में और अधिक शक्तिशाली बनाएगा।
तीन दशकों का व्यापक अनुभव
अनंत स्वरूप का चयन उनकी प्रभावशाली कार्य-पृष्ठभूमि के आधार पर किया गया है। उनके पास सार्वजनिक नीति (Public Policy) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार का 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
- प्रशासनिक करियर: वह 1992 बैच के इंडियन रेलवे पर्सनल सर्विस (IRPS) अधिकारी रहे हैं।
- महत्वपूर्ण पद: उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव और डायरेक्टर जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) जैसी अहम भूमिकाएं निभाई हैं।
- वैश्विक मंच: विश्व व्यापार संगठन (WTO), जिनेवा में भारत के प्रथम सचिव के रूप में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया है।
- रेलवे में योगदान: उन्होंने रेल मंत्री के कार्यकारी निदेशक (Executive Director) के रूप में भी अपनी सेवाएं दी हैं।
शिक्षा और बहुमुखी प्रतिभा
अनंत स्वरूप की शैक्षणिक योग्यता उन्हें एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करती है। उनके पास विज्ञान, कानून और प्रबंधन का अनूठा संगम है:
- जूलॉजी में एमएससी (M.Sc.)
- एमबीए (MBA) और एलएलबी (LLB)
- सस्टेनेबल इंफ्रास्ट्रक्चर एंड फाइनेंस में मास्टर्स सर्टिफिकेट।
उद्योग जगत के लिए इसके मायने
विशेषज्ञों का मानना है कि अनंत स्वरूप की नियुक्ति से फिक्की को निम्नलिखित क्षेत्रों में लाभ होगा:
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- लॉजिस्टिक्स और रेगुलेटरी सुधार: उनके रेल और वाणिज्य मंत्रालय के अनुभव से देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में सुधार को गति मिलेगी।
- अंतरराष्ट्रीय व्यापार: WTO के उनके अनुभव से भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाधाओं को समझने और नीतिगत पैरवी में मदद मिलेगी।
- नीतिगत समन्वय: सरकार के भीतर उच्च पदों पर कार्य करने के कारण वे उद्योगों की समस्याओं को नीति-निर्माताओं तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुँचा सकेंगे।
निष्कर्ष: अनंत स्वरूप का सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का मिश्रित अनुभव फिक्की को भारतीय उद्योग जगत की आवाज़ को और अधिक बुलंद करने में मदद करेगा, विशेषकर ऐसे समय में जब भारत ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर है।


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