फिरोजाबाद/टुंडला: जनपद फिरोजाबाद की टुंडला तहसील में उस समय हड़कंप मच गया जब तहसीलदार राखी शर्मा ने एबीपी गंगा के जिला संवाददाता रंजीत गुप्ता सहित कई लोगों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मुकदमा दर्ज करा दिया। तहसीलदार ने पत्रकार पर ब्लैकमेलिंग और प्रशासनिक कार्यों में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, हालांकि जिला प्रशासन ने इस पूरी कार्रवाई को तहसीलदार की निजी हताशा करार दिया है।
क्या है पूरा विवाद?
तहसीलदार राखी शर्मा का आरोप है कि पत्रकार रंजीत गुप्ता और उनके कुछ साथी उन पर अनैतिक दबाव बना रहे थे। उनके अनुसार, पत्रकार द्वारा उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश की गई और उनकी छवि को जनता की नजरों में खराब करने का प्रयास किया गया। तहसीलदार ने दावा किया कि इन गतिविधियों के कारण उनकी मानसिक शांति और सरकारी कामकाज प्रभावित हो रहा था, जिसके चलते उन्होंने पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराई।
जिला प्रशासन ने तहसीलदार के दावों की हवा निकाली
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब जिला प्रशासन ने अपनी ही अधिकारी के दावों को ‘निराधार और मनगढ़ंत’ बताकर खारिज कर दिया। प्रशासन द्वारा जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि:
- तबादले की खीझ: राखी शर्मा का स्थानांतरण 16 अप्रैल 2026 को प्रशासनिक आधार पर किया गया था। प्रशासन का मानना है कि तबादले से नाराज होकर तहसीलदार ने इस विवाद को जन्म दिया है।
- कार्यशैली पर सवाल: उच्चाधिकारियों के मुताबिक, तहसीलदार अपने कार्यों के प्रति लंबे समय से लापरवाह थीं, जिसके कारण उन पर पहले से ही विभागीय नजर थी।
- बेवजह का विवाद: जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पत्रकार पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से तबादले की प्रक्रिया को प्रभावित करने की एक कोशिश मात्र है।
कर्मचारी संघ ने कमिश्नर को लिखा पत्र
तहसीलदार की इस कार्रवाई के खिलाफ अब कर्मचारी संघ भी लामबंद हो गया है। कर्मचारी संघ ने कमिश्नर को एक औपचारिक पत्र लिखकर तहसीलदार के आरोपों को ‘बेबुनियाद’ बताया है। संघ का कहना है कि एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए इस तरह के झूठे आरोप लगाना प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन है। संघ ने मांग की है कि तहसीलदार राखी शर्मा के खिलाफ तुरंत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
मीडिया जगत में आक्रोश
पत्रकार रंजीत गुप्ता पर मुकदमा दर्ज होने के बाद स्थानीय मीडिया संगठनों में भारी रोष है। पत्रकारों का कहना है कि यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की आवाज दबाने की कोशिश है। प्रशासन द्वारा आरोपों को खारिज किए जाने के बाद अब इस बात पर सबकी नजर है कि पुलिस इस मामले में क्या रुख अपनाती है और तहसीलदार के खिलाफ क्या विभागीय कार्रवाई होती है।



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