वाराणसी। लगभग दस वर्षों तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद दैनिक जागरण के वरिष्ठ कर्मचारी संजय सेठ ने ग्रेच्युटी मामले में आखिरकार ऐतिहासिक जीत हासिल कर ली है। उप श्रमायुक्त, वाराणसी (DLC) के माध्यम से उन्हें 2.38 लाख रुपये की ग्रेच्युटी का चेक प्रदान किया गया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पूरे मुकदमे के दौरान दैनिक जागरण, वाराणसी प्रबंधन की ओर से कर्मचारी पर लगातार प्रशासनिक दबाव और विभिन्न हथकंडे अपनाए जाने के आरोप लगे। इसके बावजूद संजय सेठ ने कानूनी लड़ाई नहीं छोड़ी और अंततः न्याय हासिल किया।
दरअसल, वर्ष 2013 में वेज बोर्ड क्रियान्वयन की मांग को लेकर दैनिक जागरण प्रबंधन ने संजय सेठ का जम्मू-कश्मीर ट्रांसफर कर दिया था। संजय सेठ ने इसे प्रताड़ना की कार्रवाई मानते हुए स्थानांतरण स्वीकार नहीं किया और समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के नेता एवं वरिष्ठ अधिवक्ता अजय मुखर्जी के मार्गदर्शन में कानूनी कार्रवाई शुरू की।
इस पूरे मामले में अधिवक्ता आशीष टंडन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और केस को निर्णायक मोड़ तक पहुंचाया। लंबी सुनवाई के बाद उप श्रमायुक्त कार्यालय ने संजय सेठ के पक्ष में फैसला सुनाते हुए ग्रेच्युटी भुगतान का आदेश दिया।
इस फैसले को योगेश गुप्ता, अमिताभ भट्टाचार्य, विकास पाठक और महेश सेठ ने श्रमिक अधिकारों के लिए एक ऐतिहासिक निर्णय बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला मीडिया संस्थानों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए एक मजबूत नजीर बनेगा।
हालांकि, संजय सेठ की कानूनी लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। प्रबंधन की ओर से यह तर्क दिया जा रहा था कि कर्मचारी जम्मू-कश्मीर जाकर ही ग्रेच्युटी प्राप्त करे, जिसे श्रम विभाग ने खारिज कर दिया। अब पिछले दस वर्षों की ग्रेच्युटी राशि पर ब्याज को लेकर अलग से कानूनी लड़ाई जारी रहने की संभावना है।
मीडिया कर्मियों और यूनियन नेताओं का मानना है कि यह फैसला न केवल एक कर्मचारी की जीत है, बल्कि यह संदेश भी है कि लंबी और कठिन कानूनी लड़ाई के बावजूद न्याय संभव है।





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