Home » टीवी » “थ्योरी में माहिर,प्रैक्टिकल में क्या ? एंकर मीनाक्षी सिसौदिया का जनतंत्र टीवी न्यूज चैनल प्रबंधन पर आरोप

“थ्योरी में माहिर,प्रैक्टिकल में क्या ? एंकर मीनाक्षी सिसौदिया का जनतंत्र टीवी न्यूज चैनल प्रबंधन पर आरोप

60 Views

मिनाक्षी सिसोदिया-

“सुना है कुछ लोग कह रहे हैं कि “ऐसे सवाल पूछने वालों को मीडिया इंडस्ट्री में नौकरी नहीं मिलती….”

कुछ दो कौड़ी के लोगों को सच बोलना “ड्रामा” लगता है… एक मेल जो मुझे ऑफिस से प्राप्त हुआ… एक वो जो मैंने revert किया है और स्पष्टिकरण मांगा है…. जब किसी Employee का Full & Final Settlement महीनों तक रोका जाए…

अपने साथ होते बदलावों पर जब बार-बार लिखित सूचना माँगने पर भी अस्पष्ट जानकारी..कैबिन बंद करके Force resignation लिया जाए धमकी दी जाए की तुझे तो मैं PIP में देख लुंगी और तो और…बाद में सिर्फ एक लाइन का अस्पष्ट मेल भेजा जाए….

जब पहले ऑफिस बुलाने पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के बजाय शारीरिक दुर्व्यवहार का सामना करना पड़े…5 minutes की वीडियो दिखा कर 50 मिनट की फील्डिंग सेट की जा रही हो जबकि आप aggressive इसलिए हो क्यूँकि आप अपने हक के लिए बोल रहे हो…

तब सवाल उठाना ड्रामा नहीं, अपने अधिकार और सुरक्षा की मांग कहलाता है… खैर कुछ illiterate Peoples को असली right ड्रामा लगते हैं…

जब कोई मेरे जैसे साहसी लड़की उठती है खड़ी होती है अपना वैधानिक बकाया माँगती है, लिखित प्रक्रिया चाहती है और अपनी सुरक्षा की बात करती है… तब इन्हें लगता है की मीडिया इंडस्ट्री छोटी है जो चाहो करलो… अरे तुम भी अपने गिरेबान में झाको देखो क्या हो… सबकी हिस्ट्री जानती है ये छोटी सी इंडस्ट्री धक्के मार के निकाले गए हो … अब बैठ के मीडिया एथिक्स की थ्योरी पढ़ा रहे हो…

सच ये है की मुझे संबंधित अधिकारी का फोन आया कि तुम्हारा चेक तैयार है और ऑफिस चली जाओ… मैंने सिर्फ इतना कहा — कृपया लिखित, स्पष्ट और औपचारिक पुष्टि दें, ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी या सुरक्षा जोखिम न रहे…

उनके कहने पर मैंने अपनी शर्तें और सुरक्षा संबंधी चिंताएँ मेल द्वारा साझा कीं हुई है… तीन दिन हो चुके हैं…अभी तक कोई जवाब नहीं आया..

इस बीच मुझे पता चला कि कहा जा रहा है… मैं “ड्रामा” कर रही हूँ और मीडिया इंडस्ट्री में टिक नहीं पाऊँगी… चलो मान लेते हैं सिर्फ उन लोगों के अनुसार ऐसा वैसे है नहीं…. बहुत बड़ा जीवन है कॅरिअर के उस पायदान पर हूँ ZERO से स्टार्ट करने के potential रखती हूँ तो कृपया आप मेरे जीवन के भविष्यकर्ता तो बिल्कुल न बनें… एक बार नहीं सौ बार बोल चुकी हूँ… लेकिन हाँ सोचो तुम्हारी नौकरी गयी इस age में तो क्या होगा?

अगर किसी कर्मचारी का वैधानिक बकाया माँगना, लिखित प्रक्रिया चाहना और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना “ड्रामा” की श्रेणी में आता है…. तो शायद हमें प्रोफेशनलिज़्म की परिभाषा फिर से लिखनी पड़ेगी…

“करियर डर से नहीं, काम और सिद्धांतों से बनता है”

मीडिया इंडस्ट्री छोटी ज़रूर है, लेकिन इतनी भी छोटी नहीं कि सच बोलने वालों के लिए जगह ही न बचे… नौकरी मिलना या न मिलना समय तय करता है, लेकिन आत्मसम्मान खो देना…यह निर्णय व्यक्ति खुद लेता है..

मैंने सिर्फ अपना अधिकार माँगा है.. और अधिकार माँगना कभी भी करियर की कमजोरी नहीं, बल्कि पेशेवर मजबूती होती है

मीडिया सच बोलने का पेशा है… और सच यह है- सम्मान, सुरक्षा और वैधानिक अधिकार किसी एहसान के मोहताज नहीं होते…

मैं आज भी वही चाहती हूँ जो हर कर्मचारी चाहता है — स्पष्ट प्रक्रिया, लिखित जवाब और सुरक्षित वातावरण..

 

media4samachar
Author: media4samachar

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Live Cricket

Daily Astrology