“सैलरी सिर्फ पैसा नहीं, जीवन की वित्तीय योजना होती है”— इस्तीफे के बाद भी मई-जून का वेतन बकाया, इन चार अधिकारियों पर उठे सवाल
नोएडा/दिल्ली एनसीआर: टेलीविजन और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में कर्मचारियों के वेतन में देरी और छंटनी के बाद FNF (फुल एंड फाइनल) रोकने के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामला नेशनल हिंदी न्यूज़ चैनल ‘FM News’ चैनल से सामने आया है, जहाँ की पूर्व कर्मचारी माही बरनवाल ने चैनल के शीर्ष प्रबंधन और प्रमुख अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी आपबीती साझा की है। माही का आरोप है कि इस्तीफा देने के बाद भी प्रबंधन उनकी दो महीने की सैलरी, FNF और रिलीविंग लेटर जारी करने में टालमटोल कर रहा है।
लगातार सैलरी डिले से परेशान होकर दिया था इस्तीफा
पीड़ित कर्मचारी माही बरनवाल ने बताया कि वह दिसंबर 2025 से 22 जून 2026 तक FM News में रंडाउन प्रोड्यूसर (Rundown Producer) के पद पर पूरी निष्ठा के साथ कार्यरत थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि चैनल में जॉइनिंग के समय से ही सैलरी का समय पर न आना एक परम्परा बन चुका था। कई बार वेतन 20 से 25 दिन की देरी से दिया जाता था।
सैलरी के इस अनिश्चित रवैये और लगातार होने वाली देरी से तंग आकर आखिरकार उन्होंने जून में अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लेकिन इस्तीफा देने के बाद प्रबंधन का रवैया और ज्यादा उदासीन हो गया। माही की मई और जून महीने की सैलरी आज तक रिलीज नहीं की गई है।
तारीख पर तारीख: ईमेल, कॉल्स और ऑफिस विजिट भी बेअसर
माही बरनवाल ने अपने बयान में मैनेजमेंट द्वारा किए जा रहे मानसिक उत्पीड़न का जिक्र करते हुए कहा:
”10 जून से लेकर 9 जुलाई तक मुझे बार-बार पेमेंट की नई तारीखें दी गईं। मैंने हर बार इंतजार किया, पूरी तरह से प्रोफेशनल रहते हुए लगातार फॉलो-अप किया, कॉल्स किए, ऑफिस जाकर मुलाकात की और कई ईमेल्स भी भेजे… लेकिन सैलरी रिलीज नहीं की गई।”
उन्होंने आगे कहा कि सबसे ज्यादा ठेस पहुँचाने वाला काम अपनी ही मेहनत की कमाई (सैलरी) के लिए बार-बार गिड़गिड़ाना और फॉलो-अप करना होता है। उससे भी ज्यादा मानसिक तनाव तब होता है जब कॉल्स का जवाब देना बंद कर दिया जाता है और हर बार एक नई झूठी तारीख थमा दी जाती है। किसी भी कर्मचारी की सैलरी सिर्फ पैसा नहीं होती, बल्कि उससे उसके पूरे महीने की फाइनेंशियल प्लानिंग, किराए और अन्य जरूरी कमिटमेंट्स जुड़े होते हैं।
चैनल के इन 4 दिग्गज अधिकारियों पर लगा सीधा आरोप
माही बरनवाल ने अपनी इस प्रशासनिक और मानसिक प्रताड़ना के लिए सीधे तौर पर चैनल के चार प्रमुख चेहरों को जिम्मेदार ठहराया है:
- राहुल भदौरिया (डायरेक्टर)
- अवनीश जयसवाल (Digital Head)
- धर्मेंद्र कुमार (HR)
- हिमांशु दुबे (Assignment Head)
उन्होंने सवाल उठाया है कि अगर किसी कर्मचारी से समय पर शत-प्रतिशत काम लेना एक प्रोफेशनल अपेक्षा (Professional Expectation) है, तो क्या उसी समय सीमा के भीतर कर्मचारी को उसकी सैलरी देना कंपनी की जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए?
त्वरित कार्रवाई और राहत की उम्मीद
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद मीडिया जगत में एक बार फिर मीडियाकर्मियों के श्रम अधिकारों को लेकर बहस छिड़ गई है। पीड़ित पूर्व कर्मचारी ने उम्मीद जताई है कि प्रबंधन और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को अब गंभीरता से लेंगे और उनकी पेंडिंग सैलरी, FNF सेटलमेंट और रिलीविंग लेटर जल्द से जल्द रिलीज करेंगे, ताकि उन्हें आगे कानूनी कदम उठाने पर मजबूर न होना पड़े।






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