लखनऊ
भारतीय डिजिटल मीडिया के प्रमुख और निर्भीक स्वर ‘4PM’ को एक बार फिर सत्ता के कोपभाजन का शिकार होना पड़ा है। आज सुबह भारत सरकार की ओर से एक आधिकारिक ईमेल प्राप्त हुआ, जिसमें ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का हवाला देते हुए यूट्यूब चैनल को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया गया है।
यह कार्रवाई न केवल एक मीडिया संस्थान पर हमला है, बल्कि उन लाखों दर्शकों की आवाज़ को दबाने की कोशिश है जो सत्ता से तीखे सवाल पूछने वाली पत्रकारिता पर भरोसा करते हैं।
इतिहास खुद को दोहरा रहा है: क्या यह महज इत्तेफाक है?
यह पहला मौका नहीं है जब 4PM के खिलाफ इस तरह के ‘आपातकालीन’ प्रावधानों का इस्तेमाल किया गया हो। पिछले साल भी, जब देश पहलगाम हमले की संवेदनशीलता से गुजर रहा था, तब भी सरकार ने इसी तरह के गंभीर आरोपों की आड़ लेकर चैनल को ब्लॉक करवाया था।
हालांकि, वह पाबंदी ज्यादा दिनों तक टिक नहीं सकी। जैसे ही संस्थान ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया, सरकार ने अदालत में जवाब देने के बजाय ‘चुपचाप’ अपना आदेश वापस ले लिया था। आज फिर वही कहानी दोहराई जा रही है, जो यह संकेत देती है कि समस्या ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ नहीं, बल्कि पूछे जा रहे ‘असहज सवाल’ हैं।
संपादकीय कड़ा रुख: “सच को बंद करने का कोई बटन नहीं होता”
चैनल के संपादक ने इस आदेश पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सच बोलना अब ‘गुनाह’ जैसा महसूस होने लगा है। उन्होंने सीधे शब्दों में सत्ता से सवाल किया:
“अगर हमने देश के खिलाफ कुछ नहीं कहा, तो फिर यह घबराहट किस बात की है? क्या अब सत्ता से सवाल पूछना देशद्रोह हो गया है? याद रखिए, सच को बंद करने का कोई बटन नहीं होता।”
उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि 4PM किसी सरकार की मेहरबानी से नहीं, बल्कि जनता के भरोसे से खड़ा है। यदि डिजिटल मंच छीने जाएंगे, तो यह आवाज़ मंचों से, सड़कों से और हर नागरिक के मोबाइल से उठेगी।
कानूनी विशेषज्ञों की राय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी नियमों की आड़ में ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ का तर्क देकर बार-बार चैनलों को बंद करना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का खुला उल्लंघन है। जब पिछली बार सरकार को सुप्रीम कोर्ट के सामने पीछे हटना पड़ा था, तो इस बार भी इसी तरह की कानूनी चुनौती की प्रबल संभावना है।
आगे की रणनीति: जारी रहेगा संघर्ष
4PM प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि वे इस तानाशाहीपूर्ण आदेश के खिलाफ फिर से कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। जब तक यूट्यूब चैनल बहाल नहीं होता, तब तक खबरें:
- आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आप तक पहुँचती रहेंगी।
- सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्म्स (फेसबुक, टेलीग्राम, और वॉट्सऐप) पर सक्रिय रहेंगी।
- ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए जनता के बीच जाकर सच उजागर किया जाएगा।
संपादकीय टिप्पणी: लोकतंत्र तभी जीवित रहता है जब सवाल पूछने वाली आवाज़ें जीवित रहती हैं। 4PM अपने दर्शकों को विश्वास दिलाता है कि डराने और झुकाने की हर कोशिश हमें और अधिक मजबूती से सच बोलने के लिए प्रेरित करेगी।





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