नई दिल्ली | 7 अप्रैल, 2026
केंद्र सरकार ने टेलीविजन पत्रकारिता की साख और जनहित को ध्यान में रखते हुए न्यूज चैनलों की टीआरपी (Television Rating Points) को लेकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को स्पष्ट आदेश दिया है कि न्यूज चैनलों की रेटिंग की रिपोर्टिंग को तत्काल प्रभाव से अगले 4 हफ्तों तक रोक दिया जाए।
पश्चिम एशिया संकट और ‘सनसनीखेज’ पत्रकारिता पर प्रहार
सरकार के इस फैसले के पीछे सबसे मुख्य कारण पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष की कवरेज है। मंत्रालय ने पाया कि कई न्यूज चैनल इस संवेदनशील मुद्दे को “अत्यधिक सनसनीखेज और अटकलों” के साथ पेश कर रहे थे।
सरकार के आदेश की मुख्य बातें:
- डर और भ्रम पर लगाम: सनसनीखेज रिपोर्टिंग से उन नागरिकों में भारी डर और मानसिक तनाव देखा जा रहा था, जिनके परिजन युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में रह रहे हैं।
- पिछली रोक का विस्तार: इससे पहले 6 मार्च को भी रेटिंग रोकी गई थी, जिसे अब 31 मार्च के आदेश के जरिए और आगे बढ़ा दिया गया है।
- जनहित में फैसला: सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक जमीनी हालात संवेदनशील हैं, तब तक टीआरपी की होड़ में कंटेंट की गुणवत्ता से समझौता नहीं होने दिया जाएगा।
टीआरपी की ‘अंधी दौड़’ पर नियंत्रण की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि रेटिंग्स पर रोक लगने से चैनलों के बीच सबसे ‘धमाकेदार’ दिखने की प्रतिस्पर्धा कम होगी। अक्सर देखा गया है कि अधिक टीआरपी बटोरने के चक्कर में तथ्यों के बजाय नाटकीयता (Dramatization) को प्राथमिकता दी जाती है। इस रोक से चैनलों को अपनी कंटेंट रणनीति पर पुनर्विचार करने का समय मिलेगा।
मीडिया जगत में मिश्रित प्रतिक्रिया
इस फैसले ने पत्रकारिता के गलियारों में एक नई चर्चा छेड़ दी है:
- पक्ष: समर्थकों का कहना है कि यह कदम जिम्मेदार पत्रकारिता सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था।
- विपक्ष: कुछ आलोचकों का मानना है कि यह न्यूज कंटेंट पर सरकार का ‘अप्रत्यक्ष नियंत्रण’ हो सकता है, जिससे मीडिया की स्वायत्तता प्रभावित होगी।




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