अदालत की बड़ी टिप्पणी— ‘सरकार की कहानी मनगढ़ंत’, निर्दोष को जेल भेजने पर नोएडा डीएम और पुलिस अधिकारियों की निजी जवाबदेही तय
प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नोएडा मजदूर आंदोलन के दौरान गिरफ्तार की गईं 25 वर्षीय छात्र कार्यकर्ता और दिल्ली विश्वविद्यालय की ग्रेजुएट आकृति चौधरी पर लगाए गए सख्त राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) को रद्द कर दिया है। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे “मनगढ़ंत कहानी” करार दिया।
कोर्ट ने न केवल आकृति चौधरी को तुरंत रिहा करने का आदेश दिया, बल्कि गलत तरीके से हिरासत में रखने के एवज में 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी फरमान सुनाया। अदालत ने साफ किया कि मुआवजे की यह राशि गौतम बुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी (DM) आईएएस मेधा रूपम और संबंधित पुलिस अधिकारियों के वेतन से काटकर वसूल की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
- अप्रैल में हुआ था मजदूर आंदोलन: नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में कामगारों ने वेतन वृद्धि और अपने अधिकारों को लेकर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू किया था, जिसने 13 अप्रैल को उग्र रूप ले लिया।
- नक्सल और फॉरेन कनेक्शन के दावे: राज्य सरकार और पुलिस ने आकृति चौधरी पर भीड़ भड़काने, हिंसा कराने, नक्सल प्रभाव और विदेशी कनेक्शन होने के गंभीर आरोप लगाते हुए 13 मई को NSA ठोक दिया।
- सबूत पेश नहीं कर पाई सरकार: सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जब हिंसा और उकसावे से जुड़े प्रत्यक्ष सबूत या वीडियो मांगे, तो सरकार अदालत के सामने कोई भी ठोस प्रमाण पेश करने में पूरी तरह नाकाम रही।
अदालत का रुख: DM मेधा रूपम और अधिकारियों पर गाज
- अधिकारों की मांग पर NSA का दुरुपयोग: हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि केवल मजदूर अधिकारों की आवाज उठाने या विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनने पर NSA जैसा कठोर कानून लागू करना कानून की प्रक्रिया का नंगा दुरुपयोग है।
- प्रक्रियागत गड़बड़ी का खुलासा: बेंच ने पाया कि पुलिस ने आरोपी को औपचारिक नोटिस जारी करने से पहले ही अवैध रूप से कस्टडी में ले लिया था, जो संवैधानिक अधिकारों का सीधा हनन है।
- अधिकारियों के वेतन से कटेगा हर्जाना: अदालत ने प्रशासनिक मनमानी पर नजीर पेश करते हुए आदेश दिया कि बिना आधार किसी नागरिक की स्वतंत्रता छीनने की कीमत अधिकारियों को अपनी जेब से चुकानी होगी। इसी आधार पर NSA डिटेंशन ऑर्डर जारी करने वाली डीएम मेधा रूपम और शुरुआती सिफारिश करने वाले अधिकारियों की सैलरी से 5 लाख रुपये काटने के निर्देश दिए गए।



Users Today : 110
Users Yesterday : 233