मीनाक्षी सिसोदिया-
आज मैं अपने जीवन के एक बहुत कठिन अनुभव को साझा कर रही हूँ।
मीडिया इंडस्ट्री में काम करते हुए मैंने हमेशा अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाया। लेकिन हाल के समय में मुझे कार्यस्थल पर ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ा जिसने मुझे मानसिक रूप से बहुत प्रभावित किया। अत्यधिक कार्यदबाव, लगातार लंबे समय तक बिना ब्रेक काम, और व्यक्तिगत कठिन परिस्थितियों के दौरान पर्याप्त सहयोग न मिलना मेरे लिए बेहद चुनौती पूर्ण रहा।
एक गंभीर पारिवारिक संकट के दौरान भी मुझे स्थिति को संभालते हुए पेशेवर जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करनी पड़ी।
पारिवारिक क्षति के कारण मैंने छुट्टी ली लेकिन कुछ दो कौड़ी के लोगों ने मुझे दफ्तर में बने रहने के लिए दवाब डाला। मुझे कहा गया फैमिली कैसुअलिटी के पहले क्यूँ चली गयी बाद में जाना था। मरने का इंतज़ार करना था। कंपनी policy में ये नहीं है…………..
खैर भावनाओं को रोकना चाहूँगी…..श्री कृष्ण कहते हैं बेटे हर अति की क्षति जरूर होती है। समय एक ऐसा जुआ है जिसमें कोई कभी भी जीत सकता है।
मैं सिर्फ इतना कहना चाहती हूँ कि हर कार्यस्थल पर कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक व्यवहार, सुरक्षित वातावरण और मानवीय संवेदनशीलता होना बहुत जरूरी है।
अगर आप किसी भी संस्थान में काम करते हैं, तो अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें और कोई कितना भी कहे की ऐसा करोगे तो इंडस्ट्री से बाहर कर दिये जाओगे। जमाना बदल चुका है। खुद पर काम कीजिये Multitasking बनिये। किसी भी चीज को पाने के लिए हम लक्ष्य बनाते हैं। ठीक वैसे ही पैसा कमाना लक्ष्य है तो इसे कैसे भी कमाया जा सकता है। साथ ही किसी भी प्रकार के अन्याय के सामने चुप न रहिये। समझदार के लिए इशारा काफी है।


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