
नोएडा (गौतम बुद्ध नगर): एक तरफ जहां मीडिया संस्थान दुनिया को न्याय दिलाने की बातें करते हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘जनतंत्र टीवी’ न्यूज चैनल खुद अपने कर्मचारियों का शोषण करने के आरोपों में घिर गया है। सहायक श्रमायुक्त सुयश पाण्डेय द्वारा पेश की गई हालिया जांच रिपोर्ट ने चैनल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
महिला एंकर मीनाक्षी द्वारा वेतन न मिलने के संबंध मे शिकायत दर्ज कराई गई थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रम विभाग ने जांच शुरू की। जांच रिपोर्ट (संदर्भ संख्या: 40014126001084) के अनुसार, हुई जांच के दौरान संस्थान की HR हेड प्रिया अग्रवाल ने यह आश्वासन दिया था कि कर्मचारी का बकाया वेतन 25 मार्च 2026 तक भुगतान कर दिया जाएगा।
जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
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- वादे से मुकरा प्रबंधन: रिपोर्ट के अनुसार, समय सीमा बीत जाने के बाद भी संस्थान ने कोई भुगतान नहीं किया।
- असहयोगपूर्ण रवैया: जब 27 अप्रैल 2026 को दोबारा जांच की गई, तो संस्थान के प्रतिनिधि ने भुगतान के संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
- अवैध निष्कासन की पुष्टि: जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से लिखा है कि संस्थान का रवैया गैर-कानूनी है। कर्मचारी को बिना किसी वैध कारण के निकाला गया और उनका वेतन रोक लिया गया।
”प्रतिष्ठान का रवैया अक्षम्य है। संस्थान ने गैर-कानूनी तरीके से शिकायतकर्ता को निकाला और उनका वेतन भी नहीं दिया।” — जांच रिपोर्ट का अंश
श्रम विभाग की बड़ी कार्रवाई
सहायक श्रमायुक्त सुयश पाण्डेय ने मामले को बेहद गंभीर मानते हुए अपनी फाइनल रिपोर्ट पेश कर दी है। विभाग ने महिला एंकर को सलाह दी है कि वह अब सक्षम न्यायालय (Labor Court) में वाद दायर कर अपने वेतन का भुगतान प्राप्त करें व श्रम विभाग महिला एंकर का इस मामले में पूरा सहयोग देगा
इस रिपोर्ट के आने के बाद जनतंत्र टीवी प्रबंधन की साख पर बट्टा लगा है। यह मामला उन तमाम मीडिया कर्मियों के लिए एक मिसाल है जो प्रबंधन के शोषण का शिकार होते हैं, लेकिन आवाज उठाने से कतराते हैं। अब देखना यह होगा कि श्रम विभाग की इस कड़ी रिपोर्ट के बाद प्रबंधन क्या कदम उठाता है या मामला कोर्ट की दहलीज पर जाकर ही सुलझेगा।




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