वाराणसी। उत्तर प्रदेश की धार्मिक व सांस्कृतिक नगरी वाराणसी से एक बड़ा और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ के चर्चित सांध्य दैनिक समाचार पत्र ‘गांडीव’ से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित संपत्ति विवाद में एक बड़ा घटनाक्रम हुआ है। रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) की बेशकीमती संपत्ति को अपनी बताकर करीब 3 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
अदालत ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कृष्ण कुमार की अदालत में इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने आरोपियों की जमानत का कड़ा विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद प्रथम दृष्टया मामले को अत्यंत गंभीर माना और मुख्य आरोपी रचना अरोड़ा, मीरा अरोड़ा और उनके सहयोगी राजकुमार बाजपेयी को 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा (Judicial Custody) में जेल भेजने का आदेश दिया।
फर्जी दस्तावेजों के सहारे किया सौदा
विशेष मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन अधिकारी मधुसूदन तिवारी ने कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे। अभियोजन पक्ष का दावा है कि:
- आरोपियों ने सुनियोजित साजिश के तहत कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार किए।
- इन जाली दस्तावेजों के सहारे उन्होंने रक्षा मंत्रालय की स्वामित्व वाली संपत्ति को अपनी निजी संपत्ति दर्शाया।
- इसके बाद वादी (शिकायतकर्ता) को झांसे में लेकर संपत्ति का विक्रय अनुबंध (Sale Agreement) कर लिया और तीन करोड़ रुपये हड़प लिए।
अभियोजन अधिकारी ने अदालत को अवगत कराया कि वाराणसी के थाना चौक पर दर्ज मुकदमे की विवेचना के दौरान पुलिस को आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। आरोपियों ने असल तथ्यों को जानबूझकर छिपाया और जालसाजी को अंजाम दिया।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की इन धाराओं में दर्ज हुआ मुकदमा
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की है:
- धारा 316(2): धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति सुपुर्द करने के लिए प्रेरित करना।
- धारा 61(2): आपराधिक साजिश रचना।
- अन्य धाराएं: इसके साथ ही फर्जी दस्तावेज बनाने, उनका असली के रूप में उपयोग करने और तथ्य छिपाने के आरोप में धारा 351(2), 352, 338, 339 और 340(2) के तहत भी शिकंजा कसा गया है।
मामला न्यायालय में विचाराधीन
वाराणसी के एक प्रतिष्ठित सांध्य दैनिक से नाम जुड़ने के कारण यह मामला पूरे शहर और मीडिया जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, विधिक जानकारों का कहना है कि मामला फिलहाल न्यायालय के समक्ष विचाराधीन है। आरोपों की अंतिम सत्यता और आरोपियों की संलिप्तता का निर्धारण अदालत में पेश होने वाले साक्ष्यों और आगे की कानूनी जिरह के आधार पर ही तय किया जाएगा।





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