लखनऊ/नई दिल्ली। देश के जाने-माने डिजिटल पत्रकार और ‘लल्लनटॉप’ के मुखर चेहरा सौरभ द्विवेदी को लेकर मीडिया और राजनीतिक हल्कों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों की मानें तो एक साथ ‘तीन नावों की सवारी’ कर रहे द्विवेदी जल्द ही उत्तर प्रदेश की सक्रिय राजनीति में अपनी नई पारी की शुरुआत कर सकते हैं।
पत्रकारिता से सियासत तक का सफर?
हिंदी बेल्ट, विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार की नब्ज पहचानने वाले सौरभ द्विवेदी ने अपनी विशिष्ट शैली से डिजिटल मीडिया में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। चुनावी यात्राओं के दौरान जनता के बीच उनकी पैठ और राजनीतिक समीकरणों पर उनकी पकड़ को देखते हुए यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वे अब केवल सवाल पूछने तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि नीति निर्धारण की प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं।
’तीन नावों की सवारी’ और भविष्य की दिशा
वर्तमान में सौरभ द्विवेदी मीडिया प्रबंधन, संपादन और एंकरिंग जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों को एक साथ संभाल रहे हैं। जानकारों का कहना है कि उनकी यह बहुआयामी कार्यशैली उन्हें एक कुशल रणनीतिकार के रूप में स्थापित करती है। उत्तर प्रदेश, जो देश की राजनीति का केंद्र बिंदु है, वहां द्विवेदी की ‘एंट्री’ कई स्थापित समीकरणों को बदल सकती है।
यूपी की सियासत में क्यों है चर्चा?
युवा वर्ग में लोकप्रियता: सोशल मीडिया पर उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग युवाओं के बीच उन्हें एक प्रभावशाली चेहरा बनाती है।
जमीनी पकड़: ‘चुनाव यात्रा’ के माध्यम से उन्होंने यूपी के हर जिले और कस्बे की समस्याओं को करीब से देखा है।
बदलता दौर: हाल के वर्षों में कई वरिष्ठ पत्रकारों ने सक्रिय राजनीति का रुख किया है, ऐसे में द्विवेदी का नाम इस सूची में अगला हो सकता है।
हालांकि, अभी तक सौरभ द्विवेदी या उनकी टीम की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लेकिन लखनऊ के सियासी गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि वे किसी बड़े राजनीतिक दल के संपर्क में हैं या फिर किसी विशेष भूमिका में नजर आ सकते हैं।
मीडिया जगत अब यह देखने को उत्सुक है कि ‘किस्सा-गोई’ और ‘लल्लनटोपी’ अंदाज के लिए मशहूर यह पत्रकार जब सदन या चुनावी रैलियों के मंच पर होगा, तो वहां का मंजर कैसा होगा।






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