
उत्तर प्रदेश: पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन वर्तमान में कुछ मीडिया संस्थान इसे अवैध उगाही का जरिया बना रहे हैं। हाल ही में एक न्यूज़ चैनल (IND24) के जिला और ब्लॉक संवाददाताओं के लिए जारी ‘नियम एवं शर्तें’ सोशल मीडिया पर वायरल हुई हैं, जो सीधे तौर पर संवाददाताओं के आर्थिक शोषण और विज्ञापन के नाम पर अवैध वसूली की ओर इशारा करती हैं।
विज्ञापन नहीं दिया तो कटेगी जेब
वायरल दस्तावेज़ के मुताबिक, चैनल ने स्पष्ट कर दिया है कि पत्रकारिता जनसेवा नहीं, बल्कि एक ‘बिज़नेस टारगेट’ है। इसकी मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं:
जमानत राशि के नाम पर वसूली: चैनल से जुड़ने के लिए एक निश्चित राशि जमा करनी होगी, जो कभी वापस नहीं की जाएगी (Non-refundable)।
विज्ञापन का भारी दबाव: जिला स्तर के संवाददाता को हर महीने कम से कम 15,000 रुपये और ब्लॉक स्तर के संवाददाता को 10,000 रुपये का विज्ञापन व्यवसाय चैनल को देना अनिवार्य है।
सैलरी नहीं, कमीशन का खेल:
संवाददाता को वेतन के बजाय उनके द्वारा लाए गए विज्ञापनों पर मात्र 20-30 प्रतिशत कमीशन दिया जाएगा, वह भी तब जब वे अपना मासिक लक्ष्य (Target) पूरा कर लेंगे।
धमकी भरा लहजा:
यदि कोई संवाददाता विज्ञापन का पैसा जमा करने में देरी करता है, तो उसकी ‘FTP’ (खबरें भेजने का सिस्टम) तत्काल बंद कर दी जाएगी।
उगाही का नया मॉडल?
दस्तावेज़ की धारा 5 में एक विशिष्ट बैंक खाता संख्या (35393403445, भारतीय स्टेट बैंक) दी गई है, जिसमें विज्ञापन की राशि जमा करने का निर्देश है। जानकारों का कहना है कि जब कोई संस्थान अपने संवाददाताओं पर हर महीने हजारों रुपये देने का दबाव बनाता है, तो वह संवाददाता अपनी जेब भरने और चैनल का टारगेट पूरा करने के लिए अवैध उगाही का रास्ता अपनाता है।
प्रशासन और पत्रकारों में रोष
इस तरह की शर्तों ने पत्रकारिता जगत में बहस छेड़ दी है। सवाल यह उठता है कि क्या अब पत्रकारिता केवल उन्हीं के लिए बची है जो चैनल को हर महीने फिक्स इनकम दे सकें? विज्ञापन के इस अनिवार्य लक्ष्य के कारण क्षेत्र में भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका है, क्योंकि दबाव में आकर संवाददाता गलत तरीकों से धन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं।





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