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इस न्यूज चैनल के प्रबंधन व मालिकों पर मानसिक प्रताड़ना,धमकी,ब्लैकमेलिंग जैसे गंभीर आरोप,मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पत्रकार ने किया न्याय की मांग

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सच बेधड़क न्यूज़ चैनल पर गंभीर आरोप: पत्रकारों को वेतन नहीं, उल्टा पुलिस केस की धमकी! पत्रकार ने CM को पत्र लिखकर मांगा न्याय

चैनल प्रबंधन अपना पक्ष भेज सकते हैं contact@media4samachar.in

राजस्थान के एक प्रमुख न्यूज़ चैनल प्लेटफॉर्म ‘सच बेधड़क’ पर अपने कर्मचारियों का बकाया वेतन रोकने, मानसिक उत्पीड़न, और यहां तक कि पुलिस केस की धमकी देने के गंभीर आरोप लगे हैं।
चैनल में कार्यरत एक पत्रकार ने अपने बकाया वेतन को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
पत्र में पत्रकार ने आरोप लगाया है कि कंपनी दो महीने से वेतन जारी नहीं कर रही, जिससे उसका परिवार आर्थिक संकट में फंस गया है।
“क्या कर्मचारी की मेहनत इतनी सस्ती है?” पत्रकार का CM को सवाल
पत्र में पत्रकार ने लिखा है कि—
“दो महीनों से वेतन न मिलने के कारण मेरे घर का चूल्हा तक नहीं जला। मेरे बच्चों की स्कूल फीस और मेरे माता-पिता की दवाइयां तक रुक गई हैं। यह केवल आर्थिक संकट नहीं, बल्कि मेरी और मेरे परिवार की मानवीय गरिमा का हनन है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि वेतन मांगने पर चैनल प्रबंधन ने उल्टा उन्हें धमकाया, और उन पर शिकायत करने का आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि अगस्त व सितंबर 2025 के वेतन के लिए उन्होंने प्रबंधन और HR को कई बार लिखित रूप से याद दिलाया, लेकिन जवाब में उन्हें चेतावनी और दबाव का सामना करना पड़ा।

⚠️ कंपनी पर ‘जानबूझकर वेतन रोकने’ के आरोप
पत्र के अनुसार, पत्रकार ने 30 अक्टूबर 2025, 7 अक्टूबर 2025 और 12 नवंबर 2025 को कंपनी को वेतन रिलीज करने की मांग की थी। लेकिन कंपनी द्वारा बार-बार अनदेखी की गई और उल्टा उन्हें नोटिस भेजा गया, जिसमें उन पर शिकायत फैलाने का गंभीर आरोप लगाया गया। पत्र में पत्रकार लिखते हैं— “मेरी गलती बस इतनी थी कि मैंने अपने मेहनत के पैसे मांगे। इसके बदले कंपनी ने मेरे खिलाफ कार्रवाई की धमकी दी।”
पत्रकार ने दी अंतिम चेतावनी – 13 नवंबर तक वेतन नहीं मिला तो कानूनी कार्रवाई
पत्र में पत्रकार ने स्पष्ट लिखा कि यदि 13 नवंबर 2025 तक उनका बकाया वेतन नहीं दिया गया, तो वे:
कानूनी कार्रवाई

सार्वजनिक मंचों पर शिकायत

श्रम विभाग में रिपोर्ट

दर्ज करवाने के लिए बाध्य होंगे। पत्र में उन्होंने कहा—“मैं किसी व्यक्ति से नहीं, बल्कि पत्रकारिता के पेशे की गिरती गरिमा से लड़ रहा हूँ।”
पत्रकार ने मुख्यमंत्री से की मानवीय हस्तक्षेप की अपील
पत्र के अंत में पत्रकार ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि:
वे हस्तक्षेप करके उनका बकाया वेतन दिलवाएँ

मीडिया हाउस के “अनैतिक व्यवहार” पर जांच हो

पत्रकारों के अधिकार और सम्मान की रक्षा हो

पत्र में उन्होंने लिखा — “आपसे उम्मीद है कि आप एक शोषित कर्मचारी को न्याय दिलाएँगे और मीडिया हाउस को उसके कानूनी और नैतिक दायित्व पूरे करने के निर्देश देंगे।”
मामला अब चर्चा में, मीडिया जगत में उठे सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद मीडिया जगत में कई सवाल उठने लगे हैं—क्या डिजिटल मीडिया संस्थान कर्मचारियों का शोषण कर रहे हैं? क्या वेतन रोकना और धमकी देना नया चलन बन रहा है? पत्रकारों की सुरक्षा और अधिकार कौन सुनिश्चित करेगा? राज्य सरकार की ओर से अभी तक इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Disclaimer: पीड़ित पत्रकार द्वारा Media4samachar को भेजे गए मेल के अनुसार

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Author: media4samachar

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