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19 की उम्र में स्टार्टअप बेचने वाले आयुष सिंह की कहानी: कोडिंग से दर्शनशास्त्र और ‘CosmoQuick’ का सफर

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नया भारत, नए आइडिया: भारत में स्टार्टअप का इकोसिस्टम अब सिर्फ बड़े महानगरों या डिग्रीधारी प्रोफेशनल्स तक सीमित नहीं रह गया है। आज की नई पीढ़ी कॉलेज की पढ़ाई पूरी होने का इंतजार नहीं करती, बल्कि अपने इनोवेटिव आइडियाज से बाजार में हलचल मचा रही है। ऐसे ही एक युवा उद्यमी हैं आयुष सिंह, जिन्होंने महज 19 साल की उम्र में अपना पहला स्टार्टअप बेचकर टेक और एआई (AI) की दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई है।

आयुष सिंह के पिता वरिष्ठ पत्रकार यशवंत सिंह प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान भड़ास4मीडिया के फाउंडर हैं

​15 साल की उम्र में पहली कमाई और जिज्ञासा का सफर

​आयुष के सफर की शुरुआत किसी भारी-भरकम फंड या बिजनेस ब्लूप्रिंट से नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे थी इंटरनेट को समझने की उनकी गहरी जिज्ञासा।

  • शुरुआती कदम: 15 साल की उम्र में जहां बच्चे स्कूल और खेलों में व्यस्त होते हैं, आयुष ने वेब डेवलपमेंट की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था।
  • पहली सफलता: इसी उम्र में उन्हें ‘Google AdSense’ से अपनी पहली डिजिटल कमाई हुई, जिसके बाद उन्हें वेब डेवलपमेंट का पहला कमर्शियल प्रोजेक्ट भी मिला। यहीं से उनका शौक एक बड़े बिजनेस विजन में बदलने लगा।

​असफलताओं से सीखा सबक: $10,000 की वो एक डील

​हर सफल आंत्रप्रेन्योर की तरह आयुष का रास्ता भी चुनौतियों से भरा था। उन्होंने कई डिजिटल प्रोडक्ट्स पर काम किया, जिनमें से कई असफल रहे। कभी सर्वर कॉस्ट का बोझ तो कभी सही ऑडियंस तक न पहुंच पाने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।

​”असफलताएं केवल नुकसान नहीं, बल्कि आने वाली बड़ी सफलता की नींव होती हैं।”

 

​इन तमाम मुश्किलों के बीच आयुष ने एक ऐसा डिजिटल प्रोजेक्ट तैयार किया, जिसे उन्होंने 10,000 डॉलर (लगभग 8-8.5 लाख रुपये) में बेचा। इस एक टर्निंग पॉइंट ने उनका हौसला बढ़ा दिया और उन्हें यह अहसास कराया कि यदि कुछ महीनों की मेहनत ऐसा परिणाम दे सकती है, तो लंबी रेस का घोड़ा बनने पर सफलता कितनी बड़ी होगी।

​लीक से हटकर राह: टेक की दुनिया में दर्शनशास्त्र (Philosophy) के छात्र

​आमतौर पर टेक स्टार्टअप्स के फाउंडर्स इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट (IIT/IIM) बैकग्राउंड से आते हैं, लेकिन आयुष ने एक अलग और बेहद दिलचस्प रास्ता चुना। उन्होंने दर्शनशास्त्र (Philosophy) की पढ़ाई की और साथ ही समाजशास्त्र (Sociology)मनोविज्ञान (Psychology) का भी गहरा अध्ययन किया।

  • First Principle Thinking: आयुष का मानना है कि दर्शनशास्त्र व्यक्ति को किसी भी समस्या की जड़ (Root Cause) तक जाकर सोचने की क्षमता देता है।
  • भविष्य का नजरिया: उनके अनुसार, भविष्य केवल कोडिंग जानने वालों का नहीं, बल्कि इंसानी व्यवहार को समझने वालों का है। आने वाले समय में वही लोग लीड करेंगे जो कठिन सवाल पूछने और समस्याओं को एक नए नजरिए से देखने का माद्दा रखते हैं।

​नया वेंचर: क्या है CosmoQuick?

​अपनी इसी सोच और अनुभवों को समेटकर आयुष ने अपना नया वेंचर ‘CosmoQuick’ शुरू किया है।

  • उद्देश्य: यह एक ऑल-इन-वन प्लेटफॉर्म है जो भर्ती (Hiring) और करियर से जुड़ी सभी जरूरतों को एक छत के नीचे लाता है।
  • किसे होगा फायदा?: इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह नौकरी तलाशने वाले उम्मीदवारों (Job Seekers), कंपनियों (Corporates) और रिक्रूटमेंट एजेंसियों—तीनों के लिए एक सेतु का काम कर सके।
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Author: media4samachar

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