एड.राहुल मिश्रा
अवध बार एसोसिएशन-हाईकोर्ट हाईकोर्ट लखनऊ संपादक: Media4samachar
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 179 (जो पहले CrPC की धारा 160 थी) स्पष्ट रूप से पुलिस द्वारा गवाहों या पूछताछ के लिए बुलाए गए व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा करती है।
1. लिखित नोटिस अनिवार्य है (Written Notice) : BNSS की धारा 179(1) के अनुसार, पुलिस अधिकारी को किसी भी व्यक्ति को पूछताछ के लिए बुलाने हेतु लिखित आदेश (Order in Writing) देना अनिवार्य है।
केवल फोन कॉल या मौखिक आदेश पर थाने जाने की बाध्यता नहीं है।
आप पुलिस से लिखित नोटिस (Summons/Notice) की मांग कर सकते हैं।
2. विशेष छूट (Protection for Vulnerable Persons)-
धारा 179 के अंतर्गत इन विशेष श्रेणियों के लोगों को पुलिस थाने बुलाने पर रोक है।
पुलिस को इनसे पूछताछ करने के लिए इनके निवास स्थान (घर) पर ही जाना होगा :
🔴 महिलाएं:
किसी भी उम्र की महिला को पूछताछ के लिए थाने नहीं बुलाया जा सकता।
🔴 बच्चे (पुरुष):
15 वर्ष से कम आयु के बालक।
🔴 बुजुर्ग (पुरुष) :
60 वर्ष से अधिक आयु के पुरुष।
🔴 दिव्यांगजन :
जो शारीरिक या मानसिक रूप से निशक्त (Disabled) हों।
🔴 गंभीर बीमारी :
जो व्यक्ति गंभीर बीमारी (Acute Illness) से पीड़ित हो।
अपवाद : अगर ये लोग अपनी मर्जी से थाने जाना चाहें, तो वे जा सकते हैं, लेकिन पुलिस उन पर दबाव नहीं डाल सकती।
3. खर्च का प्रावधान (Reasonable Expenses)
: धारा 179(2) के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के तहत, यदि किसी व्यक्ति को (जो छूट वाली श्रेणी में नहीं है), अपने निवास स्थान से बाहर पूछताछ के लिए बुलाया जाता है, तो उसे आने-जाने का उचित खर्च (Reasonable Expenses) पाने का अधिकार है।
यह कानून आम नागरिकों को पुलिस के अनुचित दबाव से बचाने के लिए बनाया गया है।
यदि कभी ऐसी स्थिति आए, तो आप विनम्रतापूर्वक पुलिस अधिकारी को BNSS धारा 179 का हवाला देकर लिखित नोटिस की मांग कर सकते हैं और यदि आप छूट वाली श्रेणी में आते हैं, तो घर पर ही पूछताछ का आग्रह कर सकते हैं।





Users Today : 35
Users Yesterday : 139